उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है. चुनावी रणनीति को धार देने के लिए सभी राजनितिक दल कमर कस्ते नज़र आ रहे है. मुख्य तौर पर इस समय भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है. अब तक जहाँ विभिन्न अभियानों के माध्यम से जनता तक अपनी बात को पहुंचाने का काम भाजपा ने किया, वही अब भाजपा ने संगठन को भी मजबूत करने की दिशा में कवायद शुरु कर दी है. जिसके लिए बीते दिन बुधवार को दिल्ली में भाजपा प्रदेश कोर ग्रुप की अहम बैठक आयोजित की गई, और संगठन व चुनावी तैयारियों पर विस्तार से मंथन किया गया. सूत्रों के अनुसार बैठक में उन विधानसभा सीटों पर विशेष फोकस किया गया जहां पिछले चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था. साथ ही पुराने और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की भूमिका, बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के बेहतर समन्वय जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई. कुल मिलाकर, भाजपा संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा करते हुए आगामी चुनाव के लिए मजबूत रणनीति तैयार करने में जुटी है. कुछ दिन पहले भी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष देहरादून में संगठनात्मक बैठक कर चुनावी तैयारियों का फीडबैक ले चुके हैं. वही भले ही यह भाजपा के अपने संगठन का विषय हो लेकिन बीते दिन हुई दिल्ली हाईकमान के साथ प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी बैठक पर विपक्ष की भी प्रतिक्रिया सामने आई है. विपक्ष का मानना है कि अनुशासन से परिपूर्ण बताने वाली भाजपा में अंदरूनी कलह है, जिसको कम करने और प्रदेश में कई विधायकों के रिपोर्ट कार्ड के अनुसार खराब परफॉरमेंस के चलते हार के डर से बैठक को किया जा रहा है. जिसके चलते पक्ष विपक्ष के बीच यह विषय मुद्दे के रूप में आपसी बहस का केन्द्र भी बन गया है.
उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अब तेज होने लगी हैं. दिल्ली से देहरादून नेताओं की दौड़ देखी जा रही है. इस कड़ी में सत्ताधारी भाजपा ने चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए संगठनात्मक स्तर पर मंथन शुरू कर दिया है. इसी सिलसिले में दिल्ली में भाजपा की प्रदेश कोर कमेटी की अहम बैठक आयोजित हुई, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक में बूथ स्तर पर संगठन को और मजबूत करने, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने और चुनावी रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई. पार्टी ने तय किया है कि प्रदेश के पांचों लोकसभा सांसद अपने अपने क्षेत्रों में विधायकों के साथ बैठक कर फीडबैक लेंगे. वहीं 70 विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम के जरिए जनता तक भाजपा की योजनाओं व उपलब्धियों को पहुंचाने के लिए नये व पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है. दूसरी ओर विपक्ष भाजपा की इस कवायद पर सवाल उठा रहा है, विपक्ष का कहना है कि यह बैठक संगठन के भीतर बढ़ रही चुनौतियों और संभावित टिकट वितरण को लेकर चल रहे मंथन का हिस्सा है. इसके साथ ही हालही में देश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनावों में भाजपा का आया खराब रिजल्ट देखकर प्रदेश भाजपा के मन में डर है. जिस पर सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आई है, और जमकर राजनीति भी देखने को मिल रही है.
कुल मिलाकर कहा जाए तो उत्तराखंड की सियासत अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है. भाजपा ने 2027 के लिए अभी से अपनी जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. कोर कमेटी की दिल्ली बैठक, सांसदों विधायकों का समन्वय और सभी 70 सीटों पर विभिन्न कार्यक्रमों का करना इसके साफ संकेत हैं कि पार्टी बूथ से लेकर बूथ तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है. लेकिन चुनौती भी कम नहीं है, बीते चुनाव में हारी हुई सीटों को जीतना, कार्यकर्ताओं में एकजुटता लाना और सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाना सबसे बड़ा टास्क होगा. वहीं विपक्ष इसे अंदरूनी कलह और टिकट कटने का डर बता कर भाजपा को घेरने की कोशिश में है. आने वाले महीनों में बैठकों का दौर और तेज होगा. संगठन, सरकार और संघ के बीच तालमेल कितना बैठता है, इसी पर 2027 की जीत-हार तय हो पायेगी।