उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में इन दिनों केवल एक ही मुद्दा लगातार सुनाई दे रहा है, वो है शुद्धिकरण। हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण विवाद अब सियासी जंग में बदल गया है। रामलीला मैदान में जनसभा के बाद कथित हवन शुद्धिकरण को कांग्रेस ने दलित सम्मान से जोड़ दिया है।कांग्रेस का आरोप है, कि दलित नेता की सभा के बाद शुद्धिकरण करना छुआछूत और भेदभाव की मानसिकता दर्शाता है। वहीं भाजपा ने आरोपों को खारिज कर इसे कांग्रेस द्वारा राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। आपको बता दे, दिन बीतने के बाद भी मामला ठंडा नहीं होता नज़र आ रहा है, सियासी गलियारों से शुरू हुई लड़ाई अब कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गई है। राहुल गांधी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बाद अब अज्ञात के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज होने से सियासी पारा और चढ़ गया है। और जैसे जैसे मामला बढ़ रहा है, आरोप-प्रत्यारोप और एफआईआर का दौर तेज हो रहा है। इसके साथ ही सबसे बड़ा सवाल दलित समाज को लेकर है, क्योंकि अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलित वोट बैंक साधने में जुटे हैं। हालही में भाजपा ने एससी मोर्चा के नेता को राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी है, तो कांग्रेस भी दलित समाज में पकड़ मजबूत कर रही है। अब ऐसे में सवाल यही है, कि यह विवाद दलित सम्मान की लड़ाई है या चुनाव से पहले वोट साधने की रणनीति।खैर वजह जो भी हो लेकिन इस सबके चलते बयानबाजी अब शुद्धिकरण से उठ दलित वोट पर आ टिकी है, जिसके चलते आपसी बयानबाजी चरम पर है।
कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रदेश दौरे के दौरान हल्द्वानी से उठा शुद्धिकरण का मामला लगातार तूल पकड़े हुए है। लम्बा समय बीतने के बाद भी आरोप प्रत्यारोप थमने का नाम नही ले रहा है। शुद्धिकरण वाले विषय को लेकर उठे विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर कांग्रेस पर निशाना साधा है. मुख्यमंत्री धामी के अनुसार कांग्रेस के पास ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि हल्द्वानी में किसी व्यक्ति को अपमानित करने के उद्देश्य से शुद्धिकरण कराया गया था. मुख्यमंत्री ने आरोप भी लगाया कि मामले को तूल देकर समाज में भ्रम और विभाजन की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है. खास बात यह है कि इस मामले में एक दिन पहले ही अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. कांग्रेस लगातार भाजपा से माफ़ी मांगने की बात कर रही है और भाजपा इस मामले से अपना पल्ला भी झाड़ रही है. कांग्रेस भी एक बार इस मुद्दे को चुनावी मुद्दा बनाने में जुटी है और भाजपा में इसकी शुरुवात दलित समाज से जुड़े अपने सक्रिय कार्यकर्ताओं को बड़े दायित्व बाँट कर। ऐसे में आने वाले चुनाव से पहले सभी दल अनुसूचित समाज को खुश करने में जुट गए है। जिसपर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज़ नज़र आ रही है।
प्रदेश में हल्द्वानी के रामलीला मैदान से शुरू हुआ शुद्धिकरण विवाद अब सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दलित सम्मान बनाम चुनावी रणनीति की बड़ी बहस बन गया है। कांग्रेस इसे सामाजिक न्याय का मुद्दा बनाकर भाजपा को दलित विरोधी साबित करने में जुटी है तो भाजपा इसे कांग्रेस का राजनीति करना बता रही है। राहुल गांधी से लेकर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट तक एफआईआर और अब अज्ञात के खिलाफ कार्रवाई ने मामले को और पेचीदा बना दिया है. जिसके चलते कानूनी लड़ाई के साथ सड़क पर बयानबाजी तेज है। वही सवाल यही है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद दलित समाज को कितना प्रभावित करेगा। प्रदेश में करीब उन्नीस प्रतिशत दलित आबादी है, जो कई सीटों पर हार जीत तय करती है। भाजपा ने एससी मोर्चा के नेता को राष्ट्रीय जिम्मेदारी देकर संदेश दिया है, तो कांग्रेस खड़गे के बहाने दलित अस्मिता को धार दे रही है। अब देखने वाली बात यही होगी कि क्या यह शुद्धिकरण की लड़ाई सम्मान की लड़ाई है या सिर्फ वोट बैंक की सियासत।