लखनऊ अग्निकांड: 6 नामजद में से 3 गिरफ्तार, BNS और फायर सेफ्टी एक्ट के तहत केस दर्ज

Knews Desk-लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पुलिस और प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में अब तक 6 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं बाकी आरोपियों की तलाश और पूछताछ जारी है।

यह मामला थाना अलीगंज में दर्ज एफआईआर संख्या 115/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125 और 3(5) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 को भी शामिल किया है। इन धाराओं के आधार पर पुलिस यह जांच कर रही है कि हादसा लापरवाही का परिणाम था या इसमें गंभीर आपराधिक उपेक्षा शामिल थी।

FIR में 6 नामजद, 3 गिरफ्तार

पुलिस द्वारा दर्ज केस में कुल 6 लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें से तीन को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय (उम्र 43 वर्ष), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (उम्र 62 वर्ष) और तूशॉक कृष्णा जायसवाल (उम्र 31 वर्ष) शामिल हैं।

रामकृष्ण उपाध्याय का पता MM 232, सेक्टर-D, अलीगंज, शिव मंदिर के पास बताया गया है। वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, पुत्र रामेश्वर प्रसाद शुक्ला, मदेयगंज क्षेत्र के निवासी हैं और उनका पता 536/265 A, बड़ा दुर्गा मंदिर के पास, सीतापुर रोड, लखनऊ दर्ज है। तीसरे आरोपी तूशॉक कृष्णा जायसवाल, पुत्र स्वर्गीय कृष्ण कुमार जायसवाल, बालागंज क्षेत्र के निवासी हैं और उनका पता 441 R N/69/3, नीलकंठ हॉस्पिटल लेन, थाना ठाकुरगंज, लखनऊ बताया गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि हादसे की वास्तविक परिस्थितियों और उनकी भूमिका का पता लगाया जा सके।

हादसे की पृष्ठभूमि और जांच

यह भीषण अग्निकांड अलीगंज इलाके की एक बहुमंजिला इमारत में हुआ था, जहां रिहायशी भवन को अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग में लाया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस इमारत में कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और अन्य व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। इस दौरान भवन में पर्याप्त सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था।

आग लगने के बाद स्थिति इतनी भयावह हो गई कि कई लोग इमारत के अंदर ही फंस गए। धुआं तेजी से फैलने के कारण लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। राहत और बचाव दल को दीवार तोड़कर लोगों को बाहर निकालना पड़ा।

गंभीर लापरवाही के आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि इमारत में न तो उचित फायर सेफ्टी सिस्टम मौजूद था और न ही आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था थी। कई जगहों पर सीढ़ियां और निकास मार्ग बंद पाए गए, जिससे लोग छत तक भी नहीं पहुंच सके। इसके अलावा भवन में बिजली कनेक्शन और अन्य सुविधाएं भी नियमों के विरुद्ध पाई गई हैं।

प्रशासन का मानना है कि यदि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया होता, तो इस हादसे को रोका जा सकता था या कम से कम जानमाल का नुकसान कम होता।

कानूनी धाराएं और संभावित सजा

इस मामले में पुलिस ने जिन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है, वे काफी गंभीर मानी जाती हैं। BNS की धारा 105 को सबसे गंभीर माना जा रहा है, जो आपराधिक मानव वध से संबंधित है। इसमें उम्रकैद या 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

धारा 110 के तहत गंभीर लापरवाही या खतरनाक कृत्य के मामलों में आजीवन कारावास तक की सजा दी जा सकती है, विशेष परिस्थितियों में यह और बढ़ भी सकती है। धारा 125 उन मामलों में लागू होती है, जहां किसी की लापरवाही से दूसरों के जीवन को खतरा पैदा होता है या गंभीर नुकसान होता है।

धारा 3(5) का इस्तेमाल तब किया जाता है जब यह साबित हो कि एक से अधिक लोग मिलकर किसी अपराध में शामिल थे। इसका अर्थ है कि सभी आरोपी सामूहिक रूप से जिम्मेदार माने जा सकते हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई की जा रही है।

आगे की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

पुलिस ने कहा है कि यह जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। इसके आधार पर और गिरफ्तारियां संभव हैं। साथ ही, प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि किसी सरकारी अधिकारी या विभाग की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। एसआईटी को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही भवन से जुड़े सभी अनुमोदन, निरीक्षण रिपोर्ट और फायर सेफ्टी प्रमाणपत्रों की भी जांच की जा रही है। लखनऊ का यह अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था और नियमों की गंभीर अनदेखी का परिणाम माना जा रहा है। रिहायशी भवन में व्यावसायिक गतिविधियां, फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही ने मिलकर एक भयावह त्रासदी को जन्म दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले में दोषियों को कठोर सजा मिल पाएगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह जांच और फाइलों तक सीमित रह जाएगा। फिलहाल पुलिस, प्रशासन और एसआईटी की जांच जारी है और पूरे प्रदेश की नजर इस केस पर टिकी हुई है।

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