कानपुर: सास की जान लेने वाले कातिल कुत्ते ने अब बहू को बनाया निशाना, हलफनामा देकर घर वापस लाया था पौत्र

शिव शंकर सविता- शहर के विकास नगर इलाके में एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। जिस पालतू जर्मन शेफर्ड कुत्ते ‘राबर्ट’ ने पिछले साल अपनी 90 वर्षीय मालकिन को बेरहमी से मार डाला था, उसी खूंखार कुत्ते ने अब घर की बुजुर्ग बहू पर जानलेवा हमला कर दिया है। शनिवार रात हुए इस हमले में बुजुर्ग महिला के दोनों हाथ बुरी तरह जख्मी हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना ने पालतू जानवरों के हिंसक व्यवहार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सास की मौत के बाद बहू पर वार

घटना रावतपुर थाना क्षेत्र के विकास नगर (बीमा चौराहा) की है। 19 मार्च 2025 को इसी कुत्ते ने पुडुचेरी के पूर्व उपराज्यपाल त्रिभुवन प्रसाद तिवारी की बहन, 90 वर्षीय मोहिनी त्रिवेदी पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। उस समय नगर निगम ने कुत्ते को जब्त कर लिया था। लेकिन, मृतका का पौत्र प्रशांत एक हलफनामा देकर कुत्ते को दोबारा घर ले आया था। हैरानी की बात यह है कि प्रशांत अभी 1 मई को ही ‘राबर्ट’ को वापस घर लाया था और महज दो दिन बाद शनिवार रात करीब 10:30 बजे कुत्ते ने प्रशांत की मां, किरण त्रिवेदी पर हमला बोल दिया। हमले के वक्त प्रशांत घर पर मौजूद नहीं था। कुत्ते ने किरण त्रिवेदी के दोनों हाथों को बुरी तरह चबा लिया। परिजनों ने पहले इस मामले को छिपाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने के बाद मामला खुल गया।

हलफनामा बना जी का जंजाल

पड़ोसियों और नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल की घटना के बाद कुत्ते को शेल्टर होम भेजा गया था। तब प्रशांत ने नगर निगम को यह लिखकर दिया था कि वह कुत्ते को कहीं और रखेगा और यदि कुत्ता किसी पर भी हमला करता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी उसकी होगी। इसी हलफनामे के आधार पर नगर निगम ने खूंखार हो चुके जर्मन शेफर्ड को वापस सौंप दिया था। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. निरंजन ने कहा: “परिवार ने हलफनामा दिया था कि कुत्ते की जिम्मेदारी उनकी होगी। अब दोबारा हमले की सूचना मिली है। मंगलवार को टीम भेजकर कुत्ते को पकड़ा जाएगा और इस बार उसे स्थाई रूप से शेल्टर होम में बंद किया जाएगा।”

इलाके में दहशत का माहौल

इस घटना के बाद विकास नगर के निवासियों में भारी रोष और डर है। मोहल्ले वालों का कहना है कि जब कुत्ता एक बार जान ले चुका था, तो उसे दोबारा रिहाइशी इलाके में लाने की अनुमति ही क्यों दी गई? शनिवार रात जब किरण त्रिवेदी की चीखें सुनाई दीं, तो लोग मदद के लिए भी आगे आने से डर रहे थे क्योंकि उन्हें राबर्ट के हिंसक इतिहास का पता था। फिलहाल, किरण त्रिवेदी का इलाज सर्वोदय नगर स्थित रतनदीप हॉस्पिटल में चल रहा है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं, नगर निगम अब कुत्ते का पंजीकरण रद्द करने और उस पर सख्त कार्रवाई करने की तैयारी में है।

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