KNEWS DESK- पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत 9 मई को होने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी राज्य में अपनी पहली सरकार के शपथ-ग्रहण समारोह को खास बनाने की तैयारी में है, जिसे रवींद्र जयंती के दिन आयोजित किया जाएगा। इस फैसले को राजनीतिक बदलाव के साथ-साथ सांस्कृतिक जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने पुष्टि करते हुए कहा कि नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चुनावी भाषण में इस तारीख का संकेत दिया था और जीत के बाद बंगाल लौटने की बात कही थी।
चुनाव परिणामों के बाद नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसा बंगाल बनाना चाहती है जहां भयमुक्त समाज और सम्मानजनक जीवन हो, जो टैगोर की सोच से प्रेरित है।
इधर संवैधानिक प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी कोलकाता पहुंचकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को आधिकारिक अधिसूचना सौंपेंगे। इसके बाद सी.वी. आनंद बोस को परिणामों की जानकारी दी जाएगी, जो आगे सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू करेंगे।
संवैधानिक परंपरा के तहत वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस्तीफा देने के लिए आमंत्रित किया जाएगा और नई सरकार के शपथ लेने तक उन्हें कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहने का अनुरोध किया जा सकता है।
9 मई की तारीख का चयन महज औपचारिक नहीं है, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक महत्व भी है। बंगाल में “पोचिशे बोइशाख” यानी रवींद्र जयंती को एक बड़े उत्सव की तरह मनाया जाता है। ऐसे में इस दिन शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करना “नए बंगाल” की शुरुआत को सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
चार दशकों से अधिक समय तक वाम मोर्चा और फिर तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद भाजपा की सरकार का गठन राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। यह शपथ-ग्रहण समारोह न केवल सत्ता परिवर्तन का संकेत देगा, बल्कि एक नए राजनीतिक अध्याय की औपचारिक शुरुआत भी करेगा।