कानपुर पुलिस का ऑपरेशन व्हाइट पाउडर, 6 महीने में 100 से ज्यादा नशा तस्कर गिरफ्तार

सारिका गुप्ता- उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर को नशा मुक्त बनाने के लिए कानपुर पुलिस द्वारा शुरू किया गया ‘ऑपरेशन व्हाइट पाउडर’ नशे के सौदागरों के लिए काल बन चुका है। पिछले छह महीनों से शहर के कोने-कोने में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने नशा तस्करों के पूरे नेटवर्क की कमर तोड़कर रख दी है। इस महाभियान के दौरान पुलिस ने अब तक 100 से अधिक शातिर तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि करोड़ों रुपये के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं। पुलिस की इस चौतरफा घेराबंदी और ताबड़तोड़ कार्रवाई से शहर के ड्रग माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।

ड्रोन कैमरों ने खोले तस्करों के गुप्त ठिकाने

इस बार कानपुर पुलिस ने पारंपरिक तरीकों को छोड़कर हाईटेक रणनीति अपनाई है। ऑपरेशन व्हाइट पाउडर में तकनीक और सर्विलांस का ऐसा घातक कॉम्बिनेशन तैयार किया गया है, जिसने तस्करों को छिपने का मौका ही नहीं दिया। पुलिस ने शहर के संवेदनशील और संभ्रांत इलाकों के साथ-साथ उन तंग गलियों और बस्तियों में ड्रोन कैमरों से आसमान के जरिए पैनी नजर रखी, जहां नशे के कारोबार की खुफिया सूचनाएं मिल रही थीं। कई ऐसे बड़े गोदामों और गुप्त ठिकानों का भंडाफोड़ सीधे ड्रोन निगरानी के जरिए हुआ, जहां पुलिस ने सटीक घेराबंदी करके तस्करों को रंगे हाथों दबोचा। इस डिजिटल सर्विलांस के आगे माफियाओं के सारे पैंतरे धरे के धरे रह गए।

उड़ीसा और नेपाल से जुड़े थे तार, कानपुर को बनाया था डंपिंग ग्राउंड

पुलिस की गहन पूछताछ और जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कानपुर में खपाया जा रहा जहर केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बन रहा था, बल्कि इसका नेटवर्क अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा हुआ था। “नशे के सौदागर मादक पदार्थों की बड़ी-बड़ी खेप पड़ोसी देश नेपाल, उड़ीसा और देश के अन्य बाहरी राज्यों से गुप्त रास्तों के जरिए कानपुर ला रहे थे। कानपुर को एक मुख्य डंपिंग ग्राउंड बनाकर यहां से स्थानीय तस्करों के छोटे नेटवर्क के जरिए कॉलेज के छात्रों, युवाओं और मजदूरों के बीच इसकी सप्लाई की जाती थी। पुलिस ने इस पूरे चेन (सप्लाई लाइन) को बीच से ही काट दिया है।”

जमीन पर दिखने लगा असर, पुलिस बोली— ‘अभी जंग बाकी है’

लगातार हो रही गिरफ्तारियों और जब्ती का असर अब जमीनी स्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, शहर में मादक पदार्थों की आवक और बिक्री पर 80 फीसदी तक अंकुश लग चुका है और कई बड़े सक्रिय सिंडिकेट पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो चुके हैं। हालांकि, पुलिस इस सफलता पर रुकने वाली नहीं है। अधिकारियों का साफ संदेश है कि जब तक कानपुर का एक-एक कोना नशा मुक्त नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान और अधिक आक्रामक रूप से जारी रहेगा।

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