फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 की उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई थी। एयरबस की शुरुआती जांच में हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव कम होने की आशंका जताई गई है।
Knews Desk- फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 में उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। एयरबस A320 विमान की ऊंचाई कुछ ही पलों में करीब 300 फीट कम हो गई। हालांकि, पायलटों ने स्थिति को संभाल लिया और विमान को सुरक्षित दिल्ली पहुंचाया।
एयरबस ने विमान के फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर की जानकारी का विश्लेषण करने के बाद अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट और सिफारिशें एयर इंडिया को सौंप दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में आई समस्या का संबंध हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव कम होने से हो सकता है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि पहले विमान के एक हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आई। इसके करीब एक सेकंड बाद बाकी दो हाइड्रोलिक सिस्टम भी प्रभावित हुए। हालांकि, कुछ सेकंड बाद तीनों सिस्टम दोबारा काम करने लगे।
एयरबस के मुताबिक, विमान का व्यवहार हाइड्रोलिक दबाव कम होने की स्थिति से मेल खाता है। कम हाइड्रोलिक दबाव के चलते कुछ प्रेशर स्विच ने कम दबाव का संकेत दिया, जिससे विमान के एक्चुएटर्स ने काम करना बंद कर दिया। इसके परिणामस्वरूप विमान के कंट्रोल सरफेस के व्यवहार में बदलाव आया और उसकी ऊंचाई में अचानक कमी दर्ज की गई।
फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर में नहीं मिली खराबी
एयरबस की शुरुआती जांच में प्राइमरी फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर में किसी तरह की खराबी नहीं मिली है। जांच का फोकस फिलहाल विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम पर है।
एयरबस ने एयर इंडिया को ग्रीन, येलो और ब्लू हाइड्रोलिक सिस्टम की विस्तृत ऑपरेशनल जांच कराने की सलाह दी है। इसके साथ ही प्रेशर स्विच और ट्रांसड्यूसर की भी जांच करने को कहा गया है। विमान के हालिया मेंटेनेंस रिकॉर्ड की भी समीक्षा करने की सिफारिश की गई है।
145 लोग थे विमान में सवार
घटना के वक्त एयर इंडिया के इस A320 विमान में कुल 145 लोग सवार थे। ऊंचाई में अचानक बदलाव के बावजूद पायलटों ने विमान को नियंत्रित कर लिया और फ्लाइट सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गई। कुछ लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी।
फिलहाल विमान को जांच के लिए रोक दिया गया है। मामले में डीजीसीए और एयर इंडिया की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है। एयरबस की शुरुआती जांच में तकनीकी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है, लेकिन हाइड्रोलिक सिस्टम में दबाव कम होने की सटीक वजह का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है।