डिजिटल डेस्क- देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संस्थान आगामी जुलाई 2026 से एक नया और अनूठा स्नातक कार्यक्रम शुरू करने जा रहा है, जिसका नाम ‘बैचलर ऑफ साइबर सिक्योरिटी’ (B.Cyber.) होगा। यह देश का अपनी तरह का पहला ऐसा कोर्स होगा जो युवाओं को साइबर वॉरफेयर और डिजिटल सुरक्षा के आधुनिक हथियारों से लैस करेगा। सबसे खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में दाखिले के लिए छात्रों को पारंपरिक और कठिन जेईई एडवांस्ड परीक्षा पास करने की अनिवार्यता नहीं होगी। आईआईटी कानपुर ने इस विशेष कोर्स के लिए चयन प्रक्रिया को बेहद व्यावहारिक और लीक से हटकर बनाया है। इसमें प्रवेश पाने के लिए छात्रों को सबसे पहले उनके जेईई मेन के अंकों और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उनके द्वारा पहले किए गए किसी भी व्यावहारिक कार्य या कोडिंग प्रोजेक्ट के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा। प्रारंभिक छंटनी में सफल होने वाले छात्रों को आईआईटी कानपुर के कैंपस में बुलाया जाएगा, जहाँ उनकी एक व्यक्तिगत परीक्षा होगी। इस परीक्षा में एक लाइव ‘हैकाथॉन’ भी शामिल होगा, जिसके जरिए छात्रों की वास्तविक कोडिंग, समस्या समाधान और साइबर सुरक्षा कौशल की लाइव टेस्टिंग की जाएगी।
भविष्य के युद्ध साइबर स्पेस में लड़े जाएंगे: प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल
इस नए कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीन्द्र अग्रवाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा आज के दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। भविष्य में युद्ध केवल भौतिक दुनिया (जमीन, हवा या पानी) में ही नहीं, बल्कि साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे। ऐसे में देश की महत्वपूर्ण और संवेदनशील संरचनाओं जैसे पावर ग्रिड, बैंकिंग सिस्टम और डिफेंस नेटवर्क को बड़े साइबर हमलों से सुरक्षित रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी रणनीतिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए संस्थान इस नए कार्यक्रम की शुरुआत कर रहा है।
दो साल पढ़ाई और दो साल सरकारी सुरक्षा संगठनों में इंटर्नशिप
इस चार वर्षीय ‘B.Cyber.’ कार्यक्रम का ढांचा पूरी तरह से व्यावहारिक और सुरक्षा-केंद्रित रखा गया है। चयनित छात्र पहले दो साल आईआईटी कानपुर के कैंपस में बिताएंगे, जहाँ वे साइबर सुरक्षा के मजबूत सैद्धांतिक सिद्धांतों का कठोर अध्ययन करेंगे और साथ ही अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसके बाद, कोर्स के आखिरी दो साल छात्रों को विभिन्न सरकारी सुरक्षा संगठनों और खुफिया एजेंसियों में ऑन-फील्ड इंटर्नशिप करनी होगी। इस दौरान छात्र देश के सामने आने वाली वास्तविक साइबर सुरक्षा चुनौतियों, खतरों और लाइव हैकिंग अटैक्स से निपटने का व्यावहारिक अनुभव हासिल करेंगे।
वाधवानी स्कूल ऑफ एआई संभालेगा कमान
इस अत्याधुनिक कार्यक्रम को आईआईटी कानपुर के ‘वाधवानी स्कूल ऑफ एआई एंड इंटेलिजेंट सिस्टम्स’ द्वारा संचालित किया जाएगा। इस संदर्भ में वाधवानी स्कूल के डीन प्रो. नितिन सक्सेना ने कहा कि साइबर सुरक्षा एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्राथमिकता है और यह दुनिया भर में तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है। इस कार्यक्रम को मजबूत शैक्षणिक आधार और वास्तविक दुनिया के अनुभवों के एक अनोखे और शक्तिशाली संयोजन के माध्यम से डिजाइन किया गया है, ताकि देश के लिए अत्यधिक कुशल और पेशेवर साइबर योद्धा तैयार किए जा सकें। यह कोर्स उन युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है जो देश की डिजिटल सीमाओं की रक्षा करने का जज्बा रखते हैं।