Knews Desk– टाटा ग्रुप की लीडरशिप में संभावित बदलाव के बीच नोएल टाटा की भूमिका बेहद अहम हो गई है। लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहने वाले नोएल अब ग्रुप के बड़े फैसलों में प्रभावशाली स्थिति में हैं। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन होने के नाते उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में एन. चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस के अगले चेयरमैन की तलाश में नोएल टाटा पर सभी की नजरें टिकी हैं। हालांकि नए चेयरमैन का चयन टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत बनी औपचारिक समिति करेगी, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी के कारण नोएल की राय महत्वपूर्ण मानी जा रही है।नोएल टाटा का टाटा ग्रुप से जुड़ाव करीब चार दशकों से ज्यादा पुराना है। उन्होंने ससेक्स यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की और INSEAD से इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम पूरा किया। टाटा ग्रुप में आने से पहले उन्होंने ब्रिटेन में नेस्ले के साथ काम किया था। बाद में टाटा इंटरनेशनल और ट्रेंट में उन्होंने अहम जिम्मेदारियां संभालीं। खास तौर पर ट्रेंट को एक बड़े रिटेल कारोबार के रूप में खड़ा करने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। वेस्टसाइड और जूडियो जैसे ब्रांड्स के विस्तार के साथ ट्रेंट का स्टोर नेटवर्क 700 से ज्यादा स्टोर्स तक पहुंचा और कंपनी का रेवेन्यू भी तेजी से बढ़ा।
टाटा इंटरनेशनल में भी नोएल टाटा का कार्यकाल काफी प्रभावशाली रहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2010 से 2021 के बीच उनके मैनेजिंग डायरेक्टर रहते कंपनी का रेवेन्यू करीब 500 मिलियन डॉलर से बढ़कर 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। इसके अलावा उन्होंने वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और दूसरी कंपनियों में भी नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभाली हैं। टाटा स्टील और टाइटन जैसी बड़ी कंपनियों में भी वह बोर्ड स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा की स्थिति में बड़ा बदलाव आया। उन्हें टाटा ट्रस्ट्स का चेयरमैन बनाया गया। टाटा ट्रस्ट्स ही टाटा संस में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाला समूह है। इसके बाद नोएल टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल हुए। इस बदलाव ने उन्हें ग्रुप की रणनीति और भविष्य की दिशा से जुड़े फैसलों के और करीब ला दिया।
टाटा संस में एन. चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर चर्चा के बीच नोएल ने ग्रुप के कई नए कारोबारों और उनकी रणनीति पर सवाल भी उठाए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने टाटा संस के पांच साल के रणनीतिक रोडमैप, नए कारोबारों में निवेश और पूंजी की जरूरतों को लेकर स्पष्टता मांगी थी। एयर इंडिया और बिगबास्केट जैसे कारोबारों में हो रहे नुकसान को लेकर भी उनकी चिंताएं सामने आईं। वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण बिजनेस के तौर पर देखा गया।नवंबर 2026 में 70 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद नोएल टाटा ग्रुप की कई कंपनियों के बोर्ड से रिटायर होंगे। इनमें ट्रेंट, टाटा स्टील, टाइटन, वोल्टास, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन और टाटा इंटरनेशनल शामिल हैं। हालांकि, टाटा संस के डायरेक्टर के तौर पर वह बने रहेंगे। ऐसे में उनका प्रभाव खत्म होने के बजाय और अधिक रणनीतिक हो सकता है। टाटा ग्रुप के अगले चेयरमैन की तलाश के बीच नोएल टाटा अब सिर्फ परिवार के सदस्य नहीं, बल्कि टाटा ग्रुप की अगली दिशा तय करने वाले अहम पावर सेंटर के रूप में नजर आ रहे हैं।