देवरिया शिक्षक सुसाइड केस: 4 महीने से फरार पूर्व BSA शालिनी श्रीवास्तव दिल्ली से गिरफ्तार, 25 हजार का था इनाम

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के चर्चित शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड केस में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. मामले की मुख्य आरोपी और देवरिया की पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. शालिनी श्रीवास्तव पिछले चार महीनों से गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार फरार चल रही थीं. पुलिस ने उन पर और बेसिक शिक्षा कार्यालय के लिपिक (बाबू) संजीव सिंह पर 25-25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था.

हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी मांगी गई थी मोटी घूस

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति साल 2016 में देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय में हुई थी. साल 2022 में एसटीएफ की जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था और वेतन रोक दिया गया था. इसके खिलाफ शिक्षक ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें राहत मिली और कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया. हाई कोर्ट से आदेश मिलने के बाद भी देवरिया का शिक्षा विभाग उनकी बहाली और वेतन जारी करने में लगातार टालमटोल कर रहा था. आरोप है कि विभाग के अधिकारी और बाबू काम के बदले उनसे मोटी रिश्वत मांग रहे थे और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे.

गहने गिरवी रखकर दिए थे 16 लाख, फिर भी किया प्रताड़ित

विभाग की इस ट्रांसफर-पोस्टिंग और बहाली की काली कार्यप्रणाली से तंग आकर कृष्ण मोहन सिंह ने गोरखपुर स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी. मृतक शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गोरखपुर के गुलहरिया थाने में तत्कालीन BSA शालिनी श्रीवास्तव, बाबू संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था. पत्नी का आरोप था कि बहाली के नाम पर शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने 16 लाख रुपये की घूस मांगी थी. यह रकम शिक्षक ने अपने रिश्तेदारों से उधार लेकर और पत्नी के गहने गिरवी रखकर चुकाई थी. इसके बावजूद विभाग के लोग और पैसों की मांग करते हुए उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे.

वीडियो और 4 पन्नों का सुसाइड नोट बना मुख्य सबूत

आत्महत्या करने से ठीक पहले शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए सीधे तौर पर बेसिक शिक्षा विभाग के बाबू और अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था. इसके अलावा पुलिस को उनकी जेब से चार पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें उन्होंने विभाग में फैले भ्रष्टाचार और अपनी प्रताड़ना की पूरी दर्दनाक कहानी लिखी थी. पुलिस इस मामले में एक आरोपी रिटायर्ड प्रिंसिपल अनिरुद्ध सिंह को पहले ही जेल भेज चुकी है. वहीं, मूल रूप से बलिया की रहने वाली पूर्व BSA शालिनी श्रीवास्तव की लोकेशन दिल्ली में ट्रैक होने के बाद पुलिस टीम ने वहां छापेमारी कर उन्हें दबोच लिया. मामले का दूसरा मुख्य आरोपी लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.

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