Knews Desk- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अयोध्या पुलिस ने इस मामले में गिरफ्तार दो आरोपियों, रामाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव, से लंबी पूछताछ की। बुधवार सुबह दोनों को रिमांड पर लेकर फैजाबाद पुलिस लाइन लाया गया, जहां अलग-अलग टीमों ने उनसे विस्तृत पूछताछ की। करीब 13 घंटे चली इस प्रक्रिया के बाद रात में दोनों को वापस जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों के लिए अलग-अलग सवालों की सूची तैयार की थी। पूछताछ के दौरान जांच अधिकारियों ने मामले से जुड़े कई पहलुओं पर जानकारी जुटाई। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान रामाशंकर मिश्रा भावुक हो गया और उसने कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उसने कथित तौर पर कहा कि उसे कभी उम्मीद नहीं थी कि यह पूरा मामला एक दिन सामने आ जाएगा।
पूछताछ के आधार पर पुलिस रामाशंकर मिश्रा को उसके किराए के मकान पर भी लेकर गई। वहां से जांच टीम ने कई दस्तावेज बरामद किए। इसके अलावा घर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी अपने कब्जे में लिया गया। पुलिस ने उसके पिता और भाई से भी पूछताछ की, जबकि उसके एक फोटोग्राफर मित्र से भी जानकारी जुटाई गई। तलाशी और जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने रामाशंकर का कमरा सील कर दिया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि रामाशंकर मिश्रा इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा के संपर्क में था और अन्य लोगों के साथ मिलकर कथित चोरी की साजिश में शामिल था। पुलिस के अनुसार, उसके पास से पहले ही 7.32 लाख रुपये नकद, चांदी के सिक्के और कुछ आभूषण बरामद किए जा चुके हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कथित तौर पर चोरी से जुड़े कुछ पैसों का निवेश जमीन खरीदने में किया था। अब पुलिस इस दावे से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच कर रही है।
वहीं, दूसरे आरोपी सुभाष श्रीवास्तव से भी कई घंटे तक पूछताछ की गई, लेकिन अब तक उसके पास से कोई नकदी या अन्य सामान बरामद नहीं हुआ है। पुलिस का कहना है कि उससे मिली जानकारी के आधार पर कुछ तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। हालांकि, रामाशंकर की तरह उसे किसी विशेष स्थान पर ले जाकर जांच नहीं की गई। उससे केवल पूछताछ के जरिए मामले के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया गया।
मामले में दोनों आरोपियों की भूमिकाएं भी अलग-अलग बताई जा रही हैं। सुभाष श्रीवास्तव एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी है, जिसे मंदिर में चढ़ावे की नकदी की गिनती और उससे संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दूसरी ओर, रामाशंकर मिश्रा पिछले करीब पांच वर्षों से मंदिर परिसर में कार्यरत था। शुरुआत में वह श्रद्धालुओं की तस्वीरें खींचने का काम करता था, लेकिन बाद में उसे चढ़ावे को सुरक्षित रूप से काउंटिंग रूम तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई।
फिलहाल अयोध्या पुलिस इस मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी है। बरामद दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और पूछताछ से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों का गहन सत्यापन किया जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले का स्पष्ट खुलासा किया जाएगा।