मोहम्मद शमी की सियासी एंट्री की अटकलों के बीच चर्चा में तुर्क बिरादरी, इन 5 सीटों पर क्यों है अहम भूमिका?

Knews Desk – शमी के सियासत में उतरने की चर्चाओं के बीच मुरादाबाद मंडल की तुर्क बिरादरी भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। अमरोहा, संभल, कुंदरकी, रामपुर और मुरादाबाद देहात जैसी पांच विधानसभा सीटों पर तुर्क मतदाताओं की संख्या को चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण माना जाता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सीटों पर तुर्क बिरादरी का खासा प्रभाव बताया जाता है।

मंडल में विधानसभा की सात सीटें ऐसी बताई जाती हैं, जहां भाजपा को लंबे समय से चुनौती का सामना करना पड़ा है। इनमें अमरोहा, संभल, कुंदरकी, मुरादाबाद देहात, रामपुर, नगीना और नजीबाबाद शामिल हैं। इनमें से पांच सीटों पर तुर्क मतदाताओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक दलों के बीच चर्चा रहती है।

संभल, मुरादाबाद देहात और कुंदरकी सीट पर तुर्क बिरादरी से जुड़े नेताओं ने लंबे समय तक प्रतिनिधित्व किया है। संभल की राजनीति में दिवंगत डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क की पहचान भी तुर्क नेता के तौर पर रही। उनके निधन के बाद इस बिरादरी के बीच किसी बड़े राजनीतिक चेहरे को लेकर चर्चा बनी हुई है। इसी बीच अमरोहा निवासी क्रिकेटर मोहम्मद शमी की जयंत चौधरी से मुलाकात ने इन चर्चाओं को और हवा दी है।

उपलब्ध राजनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में शमी के अमरोहा सदर से चुनाव लड़ने की संभावना का जिक्र है, जबकि RLD की ओर से मुलाकात के कारणों को लेकर अलग जानकारी भी सामने आई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।

रिपोर्ट में दिए गए अनुमान के मुताबिक, संभल विधानसभा क्षेत्र में तुर्क मतदाताओं की संख्या करीब 1.15 से 1.20 लाख, कुंदरकी में 60 से 65 हजार, अमरोहा में 40 से 45 हजार, रामपुर में 30 से 35 हजार और मुरादाबाद देहात में 18 से 23 हजार बताई गई है। ये आंकड़े राजनीतिक रिपोर्ट में दिए गए अनुमान हैं, इन्हें आधिकारिक निर्वाचन आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मुरादाबाद देहात सीट पर तुर्क बिरादरी से जुड़े कई नेताओं के विधायक चुने जाने का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिजवानुल हक तीन बार विधायक चुने गए। उनके भाई शमीमुल हक दो बार विधायक बने, जबकि रिजवानुल हक के बेटे उस्मान एक बार विधायक चुने गए।

कुंदरकी सीट से हाजी अकबर पांच बार विधायक चुने गए। हाजी रिजवान भी तीन बार विधायक रहे, जबकि जियाउर्रहमान बर्क एक बार विधायक बने। संभल सीट से डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क करीब चार बार विधायक चुने गए।

संभल की असमोली और रामपुर की चमरौआ विधानसभा सीटों में भी तुर्क मतदाताओं की संख्या को लेकर चर्चा होती रही है। इन सीटों पर भी इस बिरादरी की चुनावी भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है।

इसी राजनीतिक समीकरण के बीच भाजपा की रणनीति को लेकर भी चर्चाएं हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मुरादाबाद मंडल की तुर्क प्रभावित सीटों पर भाजपा अपने सहयोगी दलों का सहारा ले सकती है और कुछ सीटों पर सहयोगी दलों के सिंबल पर प्रत्याशी उतारने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसमें मुस्लिम चेहरों को भी शामिल किए जाने की चर्चा है।

मोहम्मद शमी और जयंत चौधरी की मुलाकात ने इस राजनीतिक चर्चा को जरूर तेज कर दिया है, लेकिन शमी के चुनाव लड़ने या किसी राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में शमी की राजनीतिक भूमिका और मुरादाबाद मंडल के चुनावी समीकरण किस दिशा में जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

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