लखनऊ में कांग्रेस के भीतर घमासान, अजय राय के अगले कदम पर टिकी नजरें; राहुल गांधी से मुलाकात की चर्चा

Knews Desk- उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में 11 अक्टूबर को नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान अजय राय और उनके समर्थकों की महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी तथा उनके समर्थकों से कहासुनी हो गई थी। विवाद के दौरान हाथापाई की स्थिति बनने के बाद प्रदेश की राजनीति में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई। घटना के बाद अजय राय वाराणसी पहुंचे और अपने घर पर ही रहे। अब सवाल उठ रहा है कि वह कांग्रेस में रहकर अपनी राजनीतिक लड़ाई आगे बढ़ाएंगे या किसी दूसरी पार्टी का रुख करेंगे।

अजय राय के राजनीतिक भविष्य को लेकर बीजेपी में वापसी की चर्चा भी हो रही है। हालांकि, उनके एक करीबी कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि बीजेपी में लौटने की संभावना बेहद कम है। कार्यकर्ता के मुताबिक, वर्ष 2024 में भी अजय राय को बीजेपी में आने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उनके करीबी का यह भी कहना है कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के साथ उनकी राजनीतिक विचारधारा और कार्यशैली का तालमेल बैठना आसान नहीं होगा। ऐसे में कांग्रेस में बने रहकर संघर्ष करना उनके लिए संभावित विकल्प माना जा रहा है।

अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए पार्टी के भीतर मतभेदों की चर्चा भी होती रही है। उनके करीबी कार्यकर्ता का दावा है कि अजय राय ने मंदिरों में दर्शन और धार्मिक यात्राओं के जरिए अपनी अलग राजनीतिक छवि बनाई। कार्यकर्ता के अनुसार, उन्होंने अपने कार्यकाल में 11 बार अयोध्या और 9 बार मथुरा के दर्शन किए तथा गोवर्धन की सात कोस की परिक्रमा नंगे पैर की। दूसरी ओर, सहारनपुर, रामपुर, बरेली और मुरादाबाद जैसे क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता का भी जिक्र किया जाता है।करीबी कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के छह सांसदों की जीत के बाद प्रदेश संगठन में नेतृत्व और रणनीति को लेकर खींचतान बढ़ी। उनका दावा है कि अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के पीछे भी पार्टी के भीतर के मतभेद जिम्मेदार थे। हालांकि, इन दावों पर संबंधित नेताओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

अजय राय की आक्रामक कार्यशैली भी चर्चा का विषय रही है। उनके समर्थक इसे सरकार के खिलाफ मुखर संघर्ष बताते हैं, जबकि आलोचक संगठन के भीतर सभी नेताओं को साथ लेकर चलने की क्षमता पर सवाल उठाते रहे हैं। प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के साथ उनके मतभेदों की भी चर्चा रही है। ममता चौधरी को राजेंद्र पाल गौतम का करीबी बताया जाता है।इस बीच, अजय राय की नजर पिंडरा विधानसभा क्षेत्र पर होने की चर्चा है। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का दावा है कि वह पार्टी में रहकर इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसी सप्ताह उनकी राहुल गांधी से मुलाकात भी हो सकती है। अजय राय पांच बार विधायक रह चुके हैं। वह तीन बार बीजेपी, एक बार निर्दलीय और एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। हालांकि, पिछले पांच चुनावों में उन्हें कांग्रेस के टिकट पर हार का सामना करना पड़ा है। फिलहाल, पार्टी छोड़ने या कांग्रेस में बने रहने को लेकर अजय राय की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

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