उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में नामों की जांच और आपत्तियों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इसे संवैधानिक और जरूरी प्रक्रिया बता रही है। प्रशासनिक स्तर पर भी सत्यापन और आपत्तियों के निस्तारण की कवायद तेज है। हालाकि चुनावी साल से पहले शुरू हुई इस प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने सामने हैं। लेकिन इसी बीच प्रदेश में ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में हुआ SIR बैठक में विवाद ने सियासी तूल पकड़ लिया है। दरअसल, रुद्रपुर में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई SIR को लेकर बैठक में मतदाता सूची में आपत्तियों और कथित दोहरे वोटों के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक होती दिखाई दी, और नोकझोंक ने बड़े विवाद का रूप ले लिया, जिसका वीडिओ सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होता दिखाई दे रहा है। नोकझोंक के बाद भाजपा विधायक शिव अरोड़ा का आरोप है कि बैठक में पहुंचे पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और उनके समर्थक हिमांशु ठुकराल ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, यही नहीं बल्कि पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल के खिलाफ मुकदमे की मांग को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। विवाद के बाद जिला सहायक निर्वाचन अधिकारी की तहरीर पर पंतनगर थाने में राजकुमार ठुकराल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। वहीं कांग्रेस ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताया, और बीते मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसएसपी कार्यालय का घेराव किया, इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और बैरिकेड तोड़कर कार्यकर्ताओं ने धरना दिया। जिसके चलते SIR के बीच शुरू हुआ विवाद अब सीधे सियासी टकराव में बदल गया है, और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला देखने को मिल रहा है।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सोमवार को उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब मतदाता सूची में आपत्तियों और कथित दोहरे मतों को लेकर भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. बैठक में भाजपा और कांग्रेस दोनों पक्षों ने अपना-अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखा. भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए.वही कांग्रेस नेता राजकुमार ठुकराल का कहना है की,जो आज तक बैठक में नहीं आए, उन्होंने दबाव बनाने के लिए बैठक में अभद्रता की.साथ ही कांग्रेस नेताओं पर धमकाने का आरोप लगाया.वो जिस तरह से बोलेंगे,वैसे ही जवाब मिलेगा.जिसको पर अब एस आई आर से शुरू हुई लड़ाई ने राजनैतिक तूल पकड़ लिया है.भाजपा तंज कस रही है. तो कांग्रेस अपने नेता पर हुए मुकदमे का विरोध।
कुल मिलाकर, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया अब सिर्फ प्रशासनिक कवायद नहीं रही, बल्कि उत्तराखंड में बड़ा सियासी मुद्दा बन चुकी है। रुद्रपुर की बैठक में हुई नोकझोंक से लेकर थाने में मुकदमा और एसएसपी कार्यालय के घेराव तक, पूरा मामला भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे टकराव में बदल गया है।भाजपा इसे चुनाव आयोग की नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया बता रही है, जबकि कांग्रेस आरोप लगा रही है कि सत्ता के दबाव में विपक्षी नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या SIR की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी हो पाएगी या फिर सियासी घमासान में उलझ कर रह जाएगी। वही आगामी वर्ष 2027 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने है, ऐसे में मतदाता सूची में पारदर्शिता जरूरी है, लेकिन अगर इसी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता रहा तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है जिसका ख़ामियाजा राजनितिक दलों को भुगतना पड़ सकता है।