विशेष सत्र के बहाने, विपक्ष ने सवाल ताने ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट – धामी सरकार भले ही एक दिवसीय विशेष सत्र की तैयारी में जुटी हो लेकिन इससे पहले से ही राजनीतिक घमासान तेज हो गया था. स्थिति यह है कि जहां सरकार सदन में महिला आरक्षण के संशोधित बिल पर विपक्ष को तगड़ा झटका देने की तैयारी कर रही है, तो वहीं कांग्रेस भी संभावित निंदा प्रस्ताव का मुंह तोड़ जवाब देने का फैसला कर चुकी है.उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है. एक ओर राज्य सरकार विधानसभा का 28 अप्रैल यानी की आज एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, तो दूसरी ओर इस सत्र से पहले ही राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी और सड़क पर टकराव का माहौल बन चुका है. विशेष सत्र का एजेंडा भले ही आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया हो, लेकिन यह लगभग तय माना जा रहा है कि इसका केंद्र बिंदु महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधित बिल और उससे उपजे राजनीतिक समीकरण होंगे. इसी के साथ निंदा प्रस्ताव लाए जाने की अटकलों ने सियासी माहौल को और अधिक उग्र बना दिया है. जिस बीच आज देहरादून विधानसभा में विशेष सत्र का आयोजन रखा गया, जिसमें धामी सरकार के सभी मंत्री और विधायक मौजूद रहे इसी बीच आज का एक दिवसीय सत्र हंगामेदार भी रहा जहाँ सत्ता पक्ष निंदा प्रस्ताव को लेकर विपक्षी दलों से सवालों को करता नजर आया तो विपक्षी दलों ने भी सत्ता पक्ष पर जनता को महिला आरक्षण पर गुमराह करने को लेकर सदन में हल्ला काटा. दरअसल महिला आरक्षण को लेकर देशभर में पहले से ही बहस चल रही है. संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधित स्वरूप को पारित न करा पाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. उत्तराखंड में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है. भाजपा इस मुद्दे को महिला सम्मान और अधिकारों से जोड़कर पेश कर रही है,वहीं कांग्रेस इस पर सरकार की मंशा और राजनीति पर सवाल उठा रही है.विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस पहले से ही सतर्क नजर आ रही थी. पार्टी को आशंका थी, कि सरकार इस सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव ला सकती है, जिसके जरिए विपक्ष को घेरने की कोशिश की जाएगी. इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया था.

महिला आरक्षण को लेकर आज होने वाले विशेष सत्र से पहले इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में मजबूत स्थान देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक देश की संसद में पारित हो चुका है और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को देशवासियों ने देखा है और इसे महिलाओं के आगे बढ़ने के अवसर के रूप में माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस विषय पर चर्चा आवश्यक है, ताकि समाज में महिलाओं की भागीदारी और मजबूत हो सके। उन्होंने माताओं और बहनों को अधिक अधिकार देने पर जोर देते हुए इसे देश के विकास से जुड़ा अहम कदम बताया। वहीं विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक विरोध करता नजर आया। इसी बीच बाहर कांग्रेस का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। झबरेड़ा विधायक वीरेन्द्र जाती गन्ने से भरी ट्रॉली लेकर विधानसभा पहुंचे और किसानों के मुद्दे को उठाया।

लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के असफल होने के बाद आज मंगलवार को उत्तराखंड विधानसभा में इस पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विशेष सत्र शुरू होते ही कहा कि देश की नारियों को विश्वास दिलाते हैं कि उनका अधिकार अवश्य मिलेगा. आधी आबादी को उनका पूरा हक दिलाएंगे ताकि मातृशक्ति विकसित भारत के निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे सके. साथ ही भाजपा महिला आरक्षण बिल को लेकर आज कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर हल्ला बोलती नजर आ रही है वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इस बात को कह रही है. कि महिला आरक्षण बिल साल 2023 में पारित हो चुका है. ऐसे में इस संशोधन के जरिए सरकार परिसीमन पर जोर दे रही है. जबकि विपक्ष महिला आरक्षण बिल के समर्थन में है। और सरकार इतनी पाक साफ है तो महिला आरक्षण बिल साल 2023 में पारित को तत्काल घोषित करें, न की जनता को सत्र बुला कर गुमराह करे.

आपको बता दे, देश में अब तक कुल 4 बार परिसीमन हुआ है. इसके लिए आयोग का गठन किया गया. अब ये 5वीं बार होने जा रहा था. सबसे पहला परिसीमन 1952 में हुआ था. अंतिम परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर 2002 में हुआ था. दरअसल, 1976 में 42वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से 2001 तक परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी, ताकि जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को झटका न लगे.वही आपको बता दे, ये पूरा मामला परिसीमन से जुड़ा हुआ है यही वजह है कि जहां एक और बीजेपी विपक्षी दलों पर समर्थन न देने का आरोप लगा रही है। तो वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इस बात को कह रही है, कि महिला आरक्षण बिल साल 2023 में पारित हो चुका है. ऐसे में इस संशोधन के जरिए सरकार परिसीमन पर जोर दे रही है. जबकि विपक्ष महिला आरक्षण बिल के समर्थन में है। साथ ही धामी सरकार ने आज एक दिवसीय सत्र बुला कर सभी विपक्षी दलों पर जमकर प्रहार किया.बरहाल ऐसे में देखना होगा कि आम जनता इसकी बारीकियों को कितना ध्यान से समझ पाएगी या ये मुद्दा राजनीतिक समुद्र में जनता को गुमराह करने में काफी रहेगा।

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