केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ 15 दिन चला आंदोलन खत्म, पुलिस ने हटाया धरना

KNEWS DESK- मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट और अन्य विकास कार्यों के विरोध में पिछले 15 दिनों से चल रहा आंदोलन रविवार को पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया। प्रदर्शनकारियों को धरना स्थल से हटाकर बसों के जरिए उनके गांवों तक पहुंचाया गया। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया, जबकि आंदोलनकारियों ने इसे उनकी आवाज दबाने की कार्रवाई बताया है।

यह विरोध प्रदर्शन 3 जुलाई से कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे चल रहा था। आंदोलन की अगुवाई मुख्य रूप से आदिवासी महिलाएं कर रही थीं। प्रदर्शन के दौरान जल सत्याग्रह, चिता सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे अनोखे तरीकों से सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की गई।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर पिछले 11 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट, मझगांव सिंचाई परियोजना और रुंज सिंचाई परियोजना से प्रभावित हजारों परिवारों को अब तक उचित पुनर्वास और मुआवजा नहीं मिला है। उनका आरोप था कि विस्थापन की प्रक्रिया में लोगों के अधिकारों की अनदेखी की गई है।

आंदोलन की प्रमुख नेता दिव्या अहिरवार ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह करीब पांच बजे पुलिस की बड़ी टीम धरना स्थल पर पहुंची और मीडिया से बातचीत का अवसर दिए बिना अमित भटनागर सहित कई प्रदर्शनकारियों को अपने साथ ले गई। उनका दावा है कि यह कार्रवाई परियोजना में कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों को दबाने के उद्देश्य से की गई।

हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आदित्य पटले ने कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया। उनके मुताबिक सभी लोगों को शांतिपूर्ण ढंग से बसों में बैठाकर उनके गांव भेजा गया। पन्ना जिले के निवासियों को उनके क्षेत्र में पहुंचाया गया, जबकि अन्य प्रदर्शनकारियों को छतरपुर और आसपास के इलाकों में छोड़ा गया।

प्रशासन का कहना है कि पुलिस के साथ डॉक्टरों की टीम भी मौके पर मौजूद थी, जिसने प्रदर्शनकारियों की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की। अधिकारियों के अनुसार बराना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और निर्माणाधीन पुल के आसपास का इलाका सुरक्षित नहीं रह गया था। इसी वजह से लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए धरना स्थल खाली कराया गया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल पुनर्वास और मुआवजे तक सीमित नहीं था, बल्कि प्रभावित समुदायों के अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई भी था। अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि परियोजना के कारण लोगों की जमीन, जंगल, जल स्रोत, आजीविका और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई ग्रामीणों पर झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए, जबरन बेदखली की गई, बिजली कनेक्शन काटे गए और कुछ स्थानों पर स्कूल तक तोड़ दिए गए।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि अप्रैल में प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान और पुनर्वास को लेकर कई आश्वासन दिए थे, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हुआ। उनकी मांग थी कि परियोजना से प्रभावित सभी परिवारों की सूची प्रत्येक गांव में सार्वजनिक की जाए, पुनर्वास प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और ग्रामीणों को डराने-धमकाने की कार्रवाई बंद की जाए।

वहीं जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और इसे सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए लागू किया जा रहा है। प्रशासन ने भ्रष्टाचार और जबरन कार्रवाई के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।

हालांकि धरना समाप्त हो गया है, लेकिन पुनर्वास, मुआवजा और विस्थापन से जुड़े सवाल अब भी बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन और प्रभावित ग्रामीणों के बीच आगे की बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *