रांची: झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखाई दे रहा है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और राज्य की दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में छात्र आंदोलन कर रहे हैं। मामला केवल परीक्षा परिणाम पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहा। वायरल OMR शीट, कटऑफ सार्वजनिक नहीं किए जाने, परीक्षा कराने वाली निजी एजेंसी की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में कथित हेरफेर जैसे आरोपों के बाद CID जांच शुरू हुई। कई गिरफ्तारियां हुईं, तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने इस्तीफा दिया और मुख्य परीक्षा तक स्थगित करनी पड़ी।
19 अप्रैल की परीक्षा, जुलाई में रिजल्ट और फिर शुरू हुआ विवाद
14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई थी। यह भर्ती 103 पदों के लिए की जा रही है। जुलाई की शुरुआत में प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद विवाद तेजी से बढ़ा। अलग-अलग रिपोर्टों में सफल अभ्यर्थियों की संख्या को लेकर मामूली अंतर सामने आया है, लेकिन JPSC की इस भर्ती में 2,200 से अधिक उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए सफल घोषित किया गया।
रिजल्ट सामने आते ही अभ्यर्थियों ने कई सवाल उठाए। इनमें सबसे बड़ा सवाल श्रेणीवार कटऑफ को लेकर था। अभ्यर्थियों का आरोप था कि रिजल्ट जारी करते समय category-wise cut-off सार्वजनिक नहीं किया गया। इसके अलावा मेरिट लिस्ट जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे। कुछ अभ्यर्थियों ने दावा किया कि जारी सूची पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं थे।

वायरल OMR शीट ने विवाद को और बढ़ाया
विवाद ने तब गंभीर रूप लिया जब सोशल मीडिया पर कुछ कथित OMR शीट वायरल होने लगीं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वायरल हुई एक OMR शीट के बारे में दावा किया गया कि संबंधित उम्मीदवार ने पेपर-1 में करीब 48 सवाल ही हल किए थे, इसके बावजूद उसका रोल नंबर सफल अभ्यर्थियों में शामिल था।
हालांकि इन वायरल OMR शीटों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद इनके सामने आने के बाद छात्रों ने परीक्षा परिणाम और OMR मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग तेज हो गई।
CID की एंट्री, JPSC दफ्तर से निजी एजेंसी तक छापेमारी
विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच झारखंड CID को सौंपी गई। जांच के दौरान CID और रांची पुलिस की टीम ने JPSC मुख्यालय के साथ परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL के ठिकानों पर भी कार्रवाई की।
जांच एजेंसियों ने कंप्यूटर, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, सर्वर, मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और दस्तावेज जब्त किए। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। जांच का फोकस इस बात पर है कि क्या OMR शीट, परीक्षा परिणाम या डिजिटल डेटा में किसी तरह की छेड़छाड़ की गई थी और अगर हुई तो उसमें कौन-कौन शामिल था।

परीक्षा कराने वाली TDPL पर क्यों उठे सवाल?
इस मामले में परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL की भूमिका भी जांच के घेरे में है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस एजेंसी को JSSC ने मई 2025 में एक मामले में ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद बाद में इसे परीक्षा से संबंधित काम मिलने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। CID अब यह भी जांच रही है कि एजेंसी को जिम्मेदारी देने और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान क्या हुआ।

अभय तिवारी की भूमिका की जांच
CID जांच में अभय तिवारी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, अभय तिवारी गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के रूप में कार्यरत था और साथ ही परीक्षा एजेंसी से भी कथित तौर पर जुड़ा हुआ था।
जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या वह उम्मीदवारों के चयन के लिए कथित रूप से पैसे की मांग करने वाले किसी नेटवर्क का हिस्सा था। उसके परिवार के कुछ सदस्यों की सरकारी नौकरियों और खुद उसके विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। इन आरोपों पर जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
कई गिरफ्तारियां, पूर्व JPSC अध्यक्ष से पूछताछ
CID की जांच के दौरान JPSC अधिकारियों-कर्मचारियों और परीक्षा एजेंसी से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है। 27 जुलाई तक NDTV ने 10 गिरफ्तारियों की रिपोर्ट दी थी, जबकि 1 अगस्त की ताजा रिपोर्ट में यह संख्या 11 बताई गई है। गिरफ्तार लोगों में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं।
मामले में तत्कालीन JPSC अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से भी CID ने पूछताछ की है। 1 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, उनसे शुक्रवार को करीब आठ घंटे पूछताछ की गई। CID परीक्षा संचालन, OMR शीट और निजी एजेंसी की भूमिका सहित कई बिंदुओं की जांच कर रही है।
एल. खियांग्ते ने दिया इस्तीफा
विवाद के बीच एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले CID उनके आधिकारिक आवास और आयोग से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई कर चुकी थी।
उनका इस्तीफा आने के बाद मामला और राजनीतिक हो गया। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है और पूरे भर्ती सिस्टम की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मुख्य परीक्षा भी करनी पड़ी स्थगित
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों की मुख्य परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच प्रस्तावित थी। लेकिन बढ़ते विवाद और जांच के बीच आयोग ने मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत करीब 500 पदों से जुड़ी नौ प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया।
अब सड़कों पर छात्र, रांची बना आंदोलन का केंद्र
इस पूरे मामले में छात्रों का आंदोलन लगातार बड़ा होता गया। 30 जुलाई को बड़ी संख्या में छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च करते हुए निकले। छात्रों ने JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की।
इसके बाद आंदोलन अनिश्चितकालीन सत्याग्रह की शक्ल में आगे बढ़ा। 1 अगस्त तक छात्रों का सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं बल्कि राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था में युवाओं के विश्वास का है।
क्या मांग रहे हैं प्रदर्शनकारी छात्र?
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने 10 सूत्री मांगपत्र रखा है। उनकी प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराना, पूरे मामले की CBI और ED से जांच, विवादित भर्ती परीक्षाओं की समीक्षा, JPSC-JSSC में प्रशासनिक सुधार और भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाना शामिल है।
छात्रों ने मांग की है कि परीक्षा परिणाम जारी करते समय category-wise cut-off सार्वजनिक किया जाए और प्रत्येक उम्मीदवार को सात दिनों के भीतर स्कोर कार्ड दिया जाए। मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल कॉपी उम्मीदवारों के OTR ID पर उपलब्ध कराने जैसी मांगें भी रखी गई हैं।
छात्रों का यह भी कहना है कि JPSC और JSSC में ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय होनी चाहिए और परीक्षा के अलग-अलग चरणों के लिए पारदर्शी तरीके से एजेंसियों का चयन किया जाए।
आंदोलन को राजनीतिक दलों से दूर रखने की कोशिश
दिलचस्प बात यह है कि आंदोलन कर रहे छात्रों के एक समूह ने इसे गैर-राजनीतिक आंदोलन बताया है। जयपाल सिंह स्टेडियम के पास धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी राजनीतिक पार्टी को अपना मंच इस्तेमाल नहीं करने देंगे।
दूसरी ओर, मामला राजनीतिक रूप से भी गर्म हो चुका है। BJP और AJSU सहित विपक्षी दलों ने कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा है और CBI जांच की मांग की है।
सरकार पर बढ़ता दबाव
BJP नेता और झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि केवल CID जांच पर्याप्त नहीं है।
वहीं छात्रों का कहना है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी जातीं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 10 सूत्री मांगपत्र में प्रदर्शनकारियों ने यहां तक कहा है कि मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। यह प्रदर्शनकारियों की मांग है, सरकार का कोई निर्णय नहीं।
JPSC ने क्या कहा?
JPSC का पक्ष भी इस मामले में महत्वपूर्ण है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, आयोग ने कहा है कि प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम झारखंड हाईकोर्ट के 30 जून के आदेश के अनुपालन में जारी किया गया था।
हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने category-wise cut-off, वायरल OMR शीट और अभ्यर्थियों की ओर से उठाए गए कुछ दूसरे सवालों पर अभी विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
क्या रद्द होगी 14वीं JPSC PT परीक्षा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा रद्द होगी। अभी परीक्षा रद्द करने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। मुख्य परीक्षा जरूर स्थगित की जा चुकी है और CID की जांच जारी है।
1 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, CID पूर्व JPSC अध्यक्ष समेत मामले से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है और जांच का दायरा बढ़ रहा है। ऐसे में परीक्षा के भविष्य पर अंतिम फैसला जांच के निष्कर्ष और सरकार/आयोग की अगली कार्रवाई पर निर्भर करेगा।
दो दशक पुराना है JPSC विवादों का इतिहास
मौजूदा विवाद को सिर्फ 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित करके देखना मुश्किल है। झारखंड गठन के बाद JPSC की कई सिविल सेवा भर्तियां अलग-अलग विवादों में रही हैं। कभी रिजल्ट में संशोधन, कभी इंटरव्यू के नंबर, कभी आरक्षण, कभी उत्तर कुंजी और मूल्यांकन तो कभी कोर्ट में मामला पहुंचने के कारण आयोग पर सवाल उठते रहे हैं।
पहली और दूसरी JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच भी लंबे समय से जारी है। 7वीं से 10वीं और उसके बाद 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती के दौरान भी परिणाम, मूल्यांकन और कानूनी विवाद सामने आए थे।
अब आगे क्या?
फिलहाल तीन मोर्चों पर नजर रहेगी—CID जांच कहां तक पहुंचती है, गिरफ्तार लोगों और डिजिटल सबूतों से क्या सामने आता है और राज्य सरकार 14वीं JPSC PT को लेकर क्या फैसला करती है।
दूसरी तरफ छात्रों ने साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन केवल कुछ गिरफ्तारियों या किसी एक अधिकारी के इस्तीफे पर खत्म नहीं होगा। उनकी मांग परीक्षा व्यवस्था में ऐसी पारदर्शिता और जवाबदेही की है जिससे भविष्य में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल न उठें।
यही वजह है कि JPSC का मौजूदा विवाद अब केवल 103 सरकारी पदों की भर्ती का मामला नहीं रह गया है। यह झारखंड के उन हजारों-लाखों युवाओं के भरोसे का सवाल बन गया है, जो वर्षों की तैयारी के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं में बैठते हैं। आने वाले दिनों में CID की जांच और सरकार का फैसला तय करेगा कि छात्रों का आंदोलन खत्म होता है या झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर यह विरोध और बड़ा रूप लेता है।