यूपी-उत्तराखंड में अकेले चुनाव लड़ेगी BSP, मायावती ने गठबंधन से बनाई दूरी

Knews Desk: बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी प्रमुख मायावती ने ऐलान किया है कि BSP दोनों राज्यों में किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अपने दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी। पंजाब में भी पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

मायावती ने पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान संगठन की स्थिति, चुनावी तैयारियों और जमीनी स्तर पर पार्टी की सक्रियता की समीक्षा की गई।

मायावती का कहना है कि चुनावी गठबंधन से BSP को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिलता। पार्टी के मुताबिक गठबंधन करने पर सीटों के साथ-साथ वोट प्रतिशत पर भी असर पड़ता है। इससे कार्यकर्ताओं और समर्थकों के उत्साह पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंकने और विरोधी दलों की रणनीतियों का मजबूती से मुकाबला करने को कहा है। BSP अब अपने संगठन और पारंपरिक जनाधार के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

कांशीराम की पुण्यतिथि की तैयारियों पर जोर

बैठक में BSP संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 9 अक्टूबर को होने वाली पुण्यतिथि के कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा हुई। मायावती ने नेताओं को कार्यक्रम की तैयारियां समय रहते पूरी करने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के निर्देश दिए।

BSP ने अगले साल 15 जनवरी 2027 को जनकल्याणकारी दिवस के आयोजन की भी तैयारी शुरू कर दी है। मायावती ने पार्टी के आर्थिक सहयोग को पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर बनाने पर जोर दिया। उनका कहना है कि इससे संगठन और पार्टी की विचारधारा को मजबूती मिलेगी।

पंजाब में भी बिना गठबंधन उतरेगी BSP

पंजाब को लेकर मायावती ने स्पष्ट किया कि BSP किसी भी दल के साथ चुनावी समझौता नहीं करेगी। पार्टी का लक्ष्य संगठन का विस्तार करने और जमीनी स्तर पर अपना आधार मजबूत करने का है। उम्मीदवारों के चयन में ऐसे लोगों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं, जो पार्टी की नीतियों और विचारधारा को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचा सकें।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला अहम माना जा रहा है। पार्टी अब गठबंधन की संभावनाओं के बजाय अपने संगठन, कार्यकर्ताओं और पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने पर ध्यान देगी।

मायावती ने नेताओं से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से तैयारी करने को कहा है। BSP का दावा है कि वह आंबेडकर, कांशीराम और बहुजन आंदोलन की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए वंचित वर्गों के हितों को चुनावी मुद्दा बनाएगी।

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