डिजिटल डेस्क- बिहार में चोरी की घटनाएं अक्सर चर्चा का विषय बनती हैं, लेकिन इस बार चोरों ने सीधे भारतीय रेलवे के सिग्नल सिस्टम पर ही हाथ साफ कर दिया। राजधानी पटना के दानापुर रेल मंडल में मंगलवार की सुबह चोरों की एक करतूत ने हजारों रेल यात्रियों की सांसें अटका दीं। चोरों ने ट्रैक के पास बने ‘रूट रिले इंटरलॉकिंग’ (RRI) रूम का ताला तोड़कर महत्वपूर्ण सिग्नल केबल काट दिए, जिससे अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह चरमरा गया। घटना दानापुर स्टेशन के पूर्वी छोर पर स्थित खगौल गुमटी के पास की है। चोरों ने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए आरआरआई (RRI) केबिन में प्रवेश किया और सिग्नलिंग के लिए बिछाए गए केबल को काटकर उसमें से कीमती तांबे की स्ट्रिप निकाल ली। केबल कटते ही पूरे रूट का सिग्नल सिस्टम फेल हो गया और कंट्रोल रूम में खतरे के संकेत मिलने लगे। सुरक्षा और तकनीकी कारणों से पटना, पाटलिपुत्र और दानापुर की ओर आने-जाने वाली ट्रेनों को जहां-तहां रोकना पड़ा।
यात्रियों की बढ़ी मुसीबत, घंटों खड़ी रहीं ट्रेनें
दानापुर रेल मंडल में हुई इस चोरी की घटना ने रेल यात्रियों की मुश्किलों को अत्यधिक बढ़ा दिया। व्यस्त रूट पर अचानक सिग्नल फेल होने के कारण आरा और बिहटा के बीच अलग-अलग स्टेशनों पर 13 से भी अधिक ट्रेनें घंटों फंसी रहीं। इस व्यवधान का सबसे बुरा असर जनसाधारण एक्सप्रेस पर पड़ा, जो साढ़े चार घंटे की भारी देरी के साथ दोपहर 12 बजे के बाद पटना पहुंच सकी। इसी तरह, काशी-पटना जनशताब्दी एक्सप्रेस को बिहटा स्टेशन पर घंटों खड़ा रहना पड़ा। लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ बक्सर-पटना मेमू जैसी कई लोकल पैसेंजर ट्रेनें भी छोटे-छोटे हॉल्ट और स्टेशनों पर खड़ी रहीं, जिससे भीषण गर्मी और उमस के बीच यात्रियों को पीने के पानी और भोजन के लिए भारी किल्लत और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
रेलवे की कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही पूर्व मध्य रेलवे के सिग्नल एवं तकनीकी विभाग (S&T) की टीम दलबल के साथ मौके पर पहुंची। युद्ध स्तर पर मरम्मत का काम शुरू किया गया, लेकिन केबल बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण सिस्टम को रिबूट करने और परिचालन सामान्य करने में कई घंटे लग गए। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ट्रेनों को ‘कॉशन’ (सीमित गति) पर चलाया गया। इस मामले में दानापुर आरपीएफ (RPF) ने अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस अब उन कबाड़ी दुकानों और संदिग्धों की तलाश कर रही है जो रेलवे की संपत्तियों की खरीद-फरोख्त में शामिल रहते हैं।