बिहार के वैशाली जिले की अनिता कुमारी आधुनिक कृषि यंत्रों की मदद से खेती को आसान बना रही हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर के जरिए महिलाओं को कृषि उपकरण मिल रहे हैं, जिससे खेती की लागत घटाने और आमदनी बढ़ाने में मदद मिल रही है।
Knews Desk- बिहार में किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने और उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए आत्मा योजना यानी कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण के माध्यम से काम किया जा रहा है। इसके तहत किसान पाठशालाओं और खेतों में व्यावहारिक प्रदर्शन के जरिए किसानों को खेती के नए तरीकों की जानकारी दी जाती है। किसानों को दूसरे जिलों और राज्यों में प्रशिक्षण के लिए भी भेजा जाता है।
इसी पहल से वैशाली जिले की अनिता कुमारी की पहचान ‘खेती दीदी’ के रूप में बनी है। वह करताहा पंचायत के चंदवारा गांव की रहने वाली हैं और पूजा जीविका स्वयं सहायता समूह तथा मां जगदंबा महिला ग्राम संगठन की सदस्य हैं। उनकी पंचायत में कस्टम हायरिंग सेंटर की सुविधा उपलब्ध है।
इस सेंटर के तहत ट्रैक्टर, रोटावेटर, जीरो टिलेज मशीन, थ्रेशर और क्यारी बनाने की मशीन सहित पांच कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं। इनकी मदद से महिलाएं खेती के काम आसानी से कर पा रही हैं और अपनी उपज बेचकर आमदनी भी अर्जित कर रही हैं।
अनिता कुमारी के मुताबिक, इस योजना ने महिलाओं के जीवन में बदलाव लाया है। पहले उन्हें लोग नहीं पहचानते थे, लेकिन अब वे ‘खेती दीदी’ के नाम से जानी जाती हैं। कृषि यंत्रों की मदद से वे खुद अनाज उगाने और उसे बेचने में सक्षम हुई हैं। उनके अनुसार, इस पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
कस्टम हायरिंग सेंटर का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराना है। हर किसान के लिए महंगे उपकरण खरीदना संभव नहीं होता, इसलिए इस व्यवस्था के तहत जरूरत के अनुसार किराये पर मशीनें इस्तेमाल की जा सकती हैं। बिहार सरकार कृषि यंत्रों की खरीद पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान भी देती है। इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार की उम्मीद है।