शिव शंकर सविता- बिहार के वैशाली जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने वैवाहिक संस्था और पुरुषों के अधिकारों पर नई बहस छेड़ दी है। हाजीपुर के व्यस्त राजेंद्र चौक पर एक शख्स हाथ में पोस्टर लिए बैठा है, जिस पर लिखा है “शादी मत करना।” यह कोई विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक पति का दर्द है जो अपनी पत्नी और ससुराल वालों के जुल्मों से इस कदर टूट चुका है कि अब वह न्याय नहीं, बल्कि मौत की भीख मांग रहा है। राजेंद्र चौक पर बैठे इस व्यक्ति की पहचान मुजफ्फरपुर जिले के पताही निवासी शैलेश कुमार के रूप में हुई है। शैलेश के हाथों में मौजूद पोस्टर राह चलते लोगों का कलेजा छलनी कर रहा है। उस पर लिखा है, “जिसे भी शादी करने का मन करे, एक बार मेरी हालत देख लेना। अगर पत्नी अच्छी मिल गई तो जीवन स्वर्ग है, लेकिन गलत मिल गई तो जीते जी नरक देख लोगे। 8 साल की शादी में पत्नी सिर्फ 12 महीने साथ रही, आज मैं मौत की दुआ मांग रहा हूँ।
धोखे और प्रताड़ना की दास्तान
पीड़ित शैलेश के अनुसार, उसकी शादी 2018 में हाजीपुर के पोखरा मोहल्ला निवासी पिंकी के साथ हुई थी। शैलेश का आरोप है कि उसके ससुराल वालों ने धोखे से यह शादी करवाई। उसे यह नहीं बताया गया कि पिंकी की पहले भी एक शादी हो चुकी है। शुरुआत के एक साल तो ठीक बीते, लेकिन उसके बाद प्रताड़ना का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह आज तक खत्म नहीं हुआ। शैलेश ने बताया कि उसकी पत्नी अब उसके साथ इसलिए नहीं रहना चाहती क्योंकि उसके पास पक्का मकान और बहुत सारा पैसा नहीं है। इस विवाद के कारण 2023 में मामला फैमिली कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन पत्नी के भाइयों ने झूठ बोलकर समझौता करवा लिया और फिर से वही व्यवहार शुरू कर दिया।
सरेराह पिटाई और कारोबार से बेदखली
पीड़ित की आपबीती यहीं खत्म नहीं होती। शैलेश का आरोप है कि उसकी पत्नी ने अपने भाइयों और मोहल्ले के लड़कों के साथ मिलकर कई बार उसकी बेरहमी से पिटाई करवाई। इतना ही नहीं, जिस दुकान को उसने पार्टनरशिप में शुरू किया था, उससे भी उसे धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। शैलेश ने बताया कि उसकी पत्नी अब तक चार बार घर से भाग चुकी है और वह न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
कानून के दोहरे मापदंड पर सवाल
हाजीपुर के बीच चौराहे पर बैठे शैलेश को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है। उसका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला समाज के उस पहलू को उजागर करता है जहाँ पुरुषों के खिलाफ होने वाली घरेलू हिंसा को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। शैलेश का सवाल है कि देश में महिलाओं के लिए कई कानून और महिला आयोग बने हैं, लेकिन उन पतियों का क्या जो घर के भीतर जुल्म सह रहे हैं? उनके लिए न कोई विशेष कानून है और न ही कोई सुनवाई करने वाला आयोग।