मुश्किल हो गई बड़ी,जैनी आ खड़ी ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल चुनावी बिसात बिछाने में जुटे हैं। एक ओर सत्तापक्ष अपने विकास कार्यों और उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहा है, तो वहीं विपक्ष सरकार को घेरने के लिए पुराने मुद्दों और अधूरे सवालों को फिर से हवा दे रहा है। लेकिन इस चुनावी माहौल में कुछ ऐसे पुराने विवाद भी हैं, जो वर्षों बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है करीब 23 साल पुराना जैनी प्रकरण। साल 2003 में सामने आए इस मामले ने उस समय उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे हरक सिंह रावत का नाम इस प्रकरण से जुड़ने के बाद प्रदेश की राजनीति में खूब बयानबाजी हुई थी। हालांकि, वक्त के साथ यह मामला राजनीतिक चर्चाओं से लगभग गायब हो गया, लेकिन हालही में मुख्यमंत्री धामी के एक बयान के बाद इसे फिर से सुर्खियों में लाने का काम किया। अब इस मामले ने नया मोड़ भी ले लिया है, जब अब मुख्यमंत्री धामी, हरक सिंह, महेन्द्र भट्ट की जुबानी जंग के बीच जैनी प्रकरण में पीड़िता देहरादून पहुंची है। पीड़िता ने रोते हुए पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं, पीड़िता ने पूरे मामले की दोबारा सीबीआई जांच कराने के साथ-साथ नार्को टेस्ट और डीएनए टेस्ट की भी मांग की है। पीड़िता के इन ताजा आरोपों ने 23 साल पुराने इस विवाद को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। लेकिन इस बीच आरोप प्रत्यारोप फिर तेज़ हो गया हैं।

प्रदेश में आगामी 2027 के चुनाव आने से पहले ही एक राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है. मामला 2003 का है जो जैनी प्रकरण को एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैला हुआ दिखाई दे रहा है. जिस पर पीड़िता जैनी ने आज देहरादून पहुंचकर पत्रकारों से वार्ता में आपबीती कहानी को दो हराया साथ ही कांग्रेस के कद्दावर नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत पर एक बार फिर सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट के साथ नार्को टेस्ट की अपील सरकार से की है.जैनी का मानना है कि उनकी जान को खतरा था इसी वजह से उनको उस समय अपने  बच्चे की वजह से भागना पड़ा था वही धामी सरकार का आभार जताते हुए पुनः सीबीआई जांच की मांग की है.अब इन तमाम पहलुओं को देखते हुए राजनीति में एक बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है.कांग्रेस इसको राजनैतिक रंजिश बता रही है और भाजपा जैनी पर अपराध करने पर कठोर कारवाही की बात कर रही है ऐसे में दीपावली पर जैनी का अचानक आ कर बम फोड़ देना राजनीति में बड़े भूचाल से कम नहीं है.

कुल मिलाकर जैनी प्रकरण ने उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर गरमाहट पैदा कर दी है। 23 साल पुराने इस मामले में पीड़िता के सामने आने और गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज होना तय है। सवाल यह है कि इतने वर्षों बाद सामने आए इन आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या इस मामले की दोबारा जांच होगी और क्या पीड़िता को न्याय मिल पाएगा। वहीं, 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस प्रकरण का राजनीतिक असर कितना गहरा होगा, यह भी देखना दिलचस्प होगा। भाजपा जहां इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस और हरक सिंह रावत पर हमलावर नजर आ सकती है, वहीं कांग्रेस के सामने भी इन आरोपों पर अपना पक्ष रखने की चुनौती होगी। फिलहाल आरोपों की निष्पक्ष जांच और सच्चाई सामने आने का इंतजार है, लेकिन इतना तय है कि जैनी प्रकरण ने चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में एक नया सियासी मोर्चा खोल दिया है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *