अपने करते लड़ाई,विपक्ष को बंट गई मलाई !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड की सियासत में वर्तमान समय में एक ऐसा मामला गरमाया हुआ है.जिसने सत्तारूढ़ भाजपा के भीतर ही कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के आवंटन और चकराता क्षेत्र में कथित अनदेखी से जुड़ा है। पूरा विवाद SCSP और TSP योजनाओं के तहत जारी 9 से 12 करोड़ रुपये की टेंडर सूची को लेकर है। इसी को लेकर बीते रविवार भाजपा के ही कार्यकर्ता चकराता से देहरादून पहुंचे और समाज कल्याण मंत्री के सरकारी आवास के बाहर जमकर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है, कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य समाज कल्याण योजनाओं के लिए उनके द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को नजरअंदाज किया गया और विपक्ष से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी गई। यही नहीं प्रदर्शनकारियों ने योजनाओं में कमीशनखोरी के भी गंभीर आरोप लगाए हैं. और दावा किया है, कि करीब 80 फीसदी काम कांग्रेस से जुड़े लोगों को दिए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. लेकिन उसके बावजूद प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है ,कि इस आवंटन में भाजपा कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर विपक्ष से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाया गया है। जिसके बाद अब कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरी सूची की समीक्षा की मांग की है, मुख्यमंत्री ने भी बात करने का आश्वासन दिया है। वहीं पूरे मामले में मंत्री खजान दास ने सभी आरोपों को खारिज किया है, मंत्री का कहना है कि योजनाएं प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर स्वीकृत हुई हैं और आरोप साबित होने पर वे इस्तीफा देने से लेकर आत्महत्या तक करने को तैयार हैं। मंत्री के इस बयान व पूरे मामले पर अब राजनितिक बयानबाज़ी तेज़ नज़र आने लगी हैं।

2027 के चुनाव से पहले अपनी सरकार यानी सत्ता रूड भाजपा में अपने ही मंत्री के कामो को लेकर बगावत के सुर उठने शुरू हो गए है अपनी ही पार्टी की सरकार यानी बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने अपनों पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगाए है, तो सरकार के ही कैबिनेट मंत्री खजानदास ने इस्तीफा देकर खौफनाक कदम उठाने की चेतावनी दे डाली. मामला समाज कल्याण विभाग की योजनाओं से जुड़ा है, जिसमें बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने चकराता क्षेत्र में भारी गड़बड़ी होने और पार्टी कार्यकर्ताओं की अवहेलना का आरोप लगाया है. खास बात ये है कि इस मामले में पार्टी कार्यकर्ताओं ने अपनी ही सरकार के कैबिनेट मंत्री के घर के बाहर जोरदार प्रदर्शन भी किया है.उत्तराखंड में धामी सरकार के सामने अब असहज स्थिति पैदा हो गई,जब बीजेपी के ही कार्यकर्ताओं ने अपनी सरकार के कैबिनेट मंत्री के विरोध में सड़को पर खड़े हो कर प्रदर्शन जो कर दिया है.वही विपक्ष को एक बार फिर भाजपा को घेरने का मौका मिल गया है. 

कुल मिलाकर,यह मामला अब सिर्फ चकराता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भाजपा के अंदरूनी कलह को भी उजागर कर रहा है। जब सत्तारूढ़ दल के ही कार्यकर्ताओं को अपनी ही सरकार के मंत्री के आवास के बाहर धरना देना पड़े तो यह कई बड़े सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर समाज कल्याण की इन योजनाओं के आवंटन में पारदर्शिता कितनी बरती गई। अगर 9 से 12 करोड़ के कार्यों में 80 फीसदी काम विपक्ष से जुड़े लोगों को देने के आरोपों में जरा भी सच्चाई है तो यह भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला होगा। फिलहाल इस मामले की डोर अब मुख्यमंत्री के हाथों में है। कार्यकर्ता मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी टेंडर सूची की समीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी को कैसे शांत करती है और इस पूरे विवाद में जांच के बाद क्या कुछ निकलकर सामने आता है यह आने वाला समय ही बतायेगा।लेकिन अपनी ही सरकार में अपने ही कार्यकर्ताओं का मंत्री के खिलाफ घमासान जारी है.    

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