उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड को अलग राज्य बने 26 साल का लंबा वक्त गुजर चुका है, लेकिन स्थायी राजधानी का मुद्दा आज भी अधूरा है. राज्य की राजधानी का सवाल राज्य गठन के साथ ही सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहा है. पहाड़ की राजधानी पहाड़ में बनाने की मांग के साथ गैरसैंण का नाम लगातार सामने आता रहा है. अलग राज्य करने के आंदोलन से लेकर आज तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग कई दौर में उठती आई है. देहरादून फिलहाल अस्थायी राजधानी के तौर पर काम कर रहा है, जबकि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग लगातार उठती रही है. वही अब एक बार फिर स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग ने जोर पकड़ा है. देहरादून में अनोखे अंदाज़ में आंदोलन कर रही स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति ने विधानसभा के बाहर सामूहिक मुंडन कर सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग की है. प्रदर्शन कर रही समिति का मानना है कि लंबे समय से गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जबकि अनुच्छेद 3 के तहत केंद्र सरकार संसद में प्रस्ताव लाकर गैरसैंण को स्थायी बनाने की दिशा में कदम उठा सकती है. वही समिति ने 15 अगस्त 2026 से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर पदयात्रा शुरू कर आंदोलन को और तेज करने का ऐलान किया है. समिति का कहना है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा.वही राजधानी के मुद्दे पर सभी विपक्षी पार्टियों ने इसका समर्थन करते हुए सरकार पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए है।
स्थाई राजधानी गैरसैंण समिति द्वारा गैरसैंण में 100 दिनों से ज्यादा के क्रमिक अनशन के बाद भी जब सरकार ने स्थाई राजधानी को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया तो समिति ने मजबूर होकर एक बड़ा कदम उठाया है। समिति ने देहरादून में विधानसभा भवन के ठीक सामने बैठकर सामूहिक मुंडन करवाया।आपको बता दे, 26 सालो के राज्य को अभी तक राजधानी नहीं मिल पाई है.हर सरकार चुनाव से पहले स्थाई राजधानी का वादा राजनैतिक पार्टियां जरूर करती दिखाई देती है, मगर ये सपना आज भी अधूरा ही साबित हुआ है.ऐसे में इसको लेकर एक बार फिर बड़े आंदोलन की सुबगुहाट प्रदेश में शुरू हो गई है.वही आंदोलनकारियों का मानना है। कि सामूहिक मुंडन हिंदू संस्कारों में या तो बच्चे का होता है या फिर बड़े बुजुर्गों के निधन पर होता है, क्योंकि सरकार राजधानी गैरसैंण के लिए मर चुकी है, इसलिए हमने यह सामूहिक मुंडन करवाया है।जिसको ले कर एक बार फिर राजधानी के मुद्दे पर राजनीति शुरू हो चली है.और सभी सत्ता में रही पार्टियां अपने किये गए भविष्य के वादों पर एक दूसरे पर आरोप लगाती दिखाई दे रही है.
आपको बता दे ,100 से अधिक दिनों का ऐतिहासिक क्रमिक अनशन इस बात का प्रमाण है कि यह आंदोलन अब किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है. समिति के मुख्य संयोजक का मानना है,की जब तक गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं किया जाता है तब तक सरकार को चैन से नहीं बैठने देंगे.यही वजह है की सरकार की हठधर्मिता और वादाखिलाफी के जवाब में समिति ने ऐतिहासिक आंदोलनों की शुरुआत करने का निर्णय लिया है. इसी कड़ी में 13 अगस्त को सवेरे देहरादून विधानसभा के बाहर स्थायी राजधानी बनाये जाने की मांग को लेकर और इस संकल्प के साथ सरकार के खिलाफ रोष के प्रतीक स्वरूप सामूहिक मुंडन किया गया. इसके तुरंत बाद स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यानी 15 अगस्त को सेवर विधानसभा के बाहर से देहरादून से गैरसैंण तक महा पदयात्रा निकाली गई.जिस पर प्रदेश में स्थाई राजधानी गैरसैंण को बनाने की मांग एक बार जरूर बढ़ गई है.जो आने वाले चुनाव की दृष्टि से देखे तो सभी राजनैतिक दलों के लिए चिंता का बड़ा विषय है.अब देखना बाकि होगा क्या इसको लेकर मौजूदा भाजपा की सरकार बड़ा फैसला लेती है.या इसका असर आगामी चुनाव में जनता की नाराजगी के साथ देखने को मिलेगा।