मानसून को लेकर दावा, विपक्ष कहे दिखावा !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में मानसून जल्द ही दस्तक देने वाला है, पर्वतीय राज्य होने के कारण हर वर्ष राज्य में भारी दैवीक आपदा और चुनौतियों का खतरा बना रहता है, जो राज्य सरकार के लिए गंभीर विषय भी बन जाता है. पिछले वर्ष आई भीषण आपदाओं ने आमजन के साथ-साथ राज्य सरकार को भी चिंतित करके रख दिया था. वही इन्ही सब विषयों को देखते हुए इस बार सरकार समय से पहले अलर्ट मोड पर है. आगामी मानसून से निपटने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं और सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आमजन को किसी भी तरह की परेशानी मानसून के दौरान न होने पाये जिसके चलते अधिकारी भी तैयारियों में जुटे हैं. मानसून से पहले नदी-नालों की सफाई, सड़क, पेयजल और खाद्य व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है. राज्य के सभी जिलों में समय से पहले लगभग तीन महीने का एडवांस राशन पहुंचाया जा रहा है. हालांकि, इस बार चुनौती दोगुनी है क्योंकि चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा भी अपने चरम पर है. ऐसे में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्थानीय लोगों की जरूरतों को एक साथ संभालना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी नज़र आ रही है. वही सरकार का दावा है कि वह इस बार मानसून की चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और कड़ी मशक्कत की जा रही है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है, विपक्ष का आरोप है कि हर साल दावे किए जाते हैं, लेकिन आपदा के समय जमीनी हालात अलग दिखाई देते है. जिसके चलते मानसून की तैयारियां अब राजनीतिक गलियारों में बहस का मुद्दा बन गई हैं.

उत्तराखंड में मानसून बस आने ही वाला है. पहाड़ी भूगोल के कारण यहां हर साल बारिश अपने साथ भारी तबाही और चुनौतियां लेकर आती है. यही वजह है कि मानसून को लेकर राज्य सरकार गंभीर नज़र आ रही है. पिछले साल की भीषण आपदाओं ने आमजन और सरकार दोनो को प्रभावित किया, उन हालात से सबक लेते हुए इस बार राज्य सरकार समय से पहले ही अलर्ट मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री से लेकर जिला स्तर तक लगातार समीक्षा बैठकें हो रही हैं. हर अधिकारी को साफ निर्देश दिये जा रहे है. सड़क, पेयजल और खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. सरकार द्वारा लगभग तीन महीने का एडवांस राशन पहले ही जिलों की राशन दुकानों में पहुंचा दिया गया है. वही चारधाम यात्रा और हेमकुंड साहिब यात्रा अपने चरम पर है, लाखों श्रद्धालु इस समय उत्तराखंड में हैं, ऐसे में उनकी सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करना सरकार के लिए बड़ी जिम्मेदारी बनी हुई है. सरकार भले ही पूरी तैयारी का दावा कर रही है और दिन-रात मशक्कत की बात कह रही है, लेकिन विपक्ष अभी भी हमलावर है विपक्ष का आरोप है कि तैयारियों का बोलबाला करके भले ही सरकार पीठ थपथपाने का काम कर रही है, लेकिन वर्तमान तैयारियां यही दर्शा रही है कि इससे पहले सरकार कभी भी मानसून को लेकर गंभीर नही हुई और साथ ही सरकार के दावे भी केवल हवाहवाई ही है. इसके साथ ही विपक्ष के सावल है कि हर बार समीक्षा बैठक की जाती आई है लेकिन मानसून से पहले ही क्यों निर्माण कार्य किये जाते है. वही विपक्ष के आरोप के बाद सत्ता पक्ष भी प्रतिकिर्या देता नज़र आ रहा है.

मानसून सीजन उत्तराखंड के लिए सिर्फ एक मौसम नहीं, बल्कि हर साल एक बड़ी परीक्षा बनकर आता है. सरकार के अलर्ट मोड और तैयारियों के दावों के बीच विपक्ष के सवाल भी उतने ही गंभीर हैं. चारधाम-हेमकुंड साहिब यात्रा के चरम पर होने से चुनौती दोहरी हो गई है. अब देखना यह होगा कि जमीनी हकीकत दावों से कितना मेल खाती है. वही पिछली आपदाओं से सबक लेकर की गई तैयारियां जनता को राहत देंगी या फिर पहाड़ एक बार फिर बेबस नजर आएगा, इसका फैसला आने वाला मानसून का समय ही तय करेगा।

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