उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। प्रदेश में मदरसा बोर्ड को खत्म कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को सशक्त और सुचारु करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। सरकार का कहना है, कि इस नई व्यवस्था का मकसद मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। नई व्यवस्था के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की शिक्षा को एक व्यापक ढांचे में लाया जाएगा, जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की व्यवस्था और बच्चों के शैक्षणिक भविष्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का तर्क है. कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें मुख्यधारा के शैक्षणिक अवसरों से जोड़ना जरूरी है। बदलते समय के साथ बच्चों को साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक शिक्षा से जोड़ना होगा ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और वैज्ञानिक बन सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी मदरसों को शिक्षा विभाग से अनुमति और प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य किया है,और मान्यता न लेने वाले मदरसों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सबके चलते सरकार के इस फैसले पर सियासत भी तेज हो गई है, जहाँ एक ओर सरकार इसे शिक्षा सुधार बता रही है तो विपक्ष इसे तुष्टिकरण की राजनीति बता रहा है। विपक्ष का मानना है कि राज्य में कई अन्य शिक्षा के केन्द्र है. जिनकी अवस्था ठीक नही, पहले उन्हे दुरुस्त करना चाहिए लेकिन सरकार केवल विशेष वर्ग को टारगेट करने का काम कर रही है। इस बीच आपसी बयानबाज़ी भी चरम पर देखी जा रही है।
प्रदेश में मदरसा बोर्ड को भंग कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में विलय कर दिया गया है। इस क्रम में मदरसों को अब नए प्राधिकरण के तहत मान्यता लेनी होगी, अन्यथा कड़ी कार्यवाही की चेतावनी सरकार ने दी हैं। बीते दिन देहरादून से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री धामी के अनुसार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्देश्य किसी वर्ग को टारगेट करना नहीं, बल्कि सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सरकार की योजनाओं का लाभ पात्रता के आधार पर बिना भेदभाव के दिया जा रहा है।धामी सरकार ने अब अवैध मदरसों को सील करते हुए चार मदसरो पर बड़ी कारवाही कर दी है.वही विपक्ष सरकार के दावो को सिरे से ख़ारिज कर रहा है, इस बीच राजनीति भी जमकर हो रही है।
धामी सरकार मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी में है,राज्य सरकार का मानना है कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को सशक्त करने से मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, वैज्ञानिक और रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी। इससे वे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और वैज्ञानिक बनने के सपने को पूरा कर सकेंगे और मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। साथ ही शिक्षा विभाग से अनुमति और प्राधिकरण से मान्यता अनिवार्य करने से प्रदेश में संचालित अवैध और बिना मान्यता वाले मदरसों पर भी शिकंजा कसेगा और शिक्षा में पारदर्शिता आएगी। लेकिन इस फैसले के बाद सियासी पारा भी चढ़ गया है, अन्य विपक्षी दलों सहित कांग्रेस का आरोप है कि सरकार शिक्षा सुधार के नाम पर एक विशेष समुदाय को निशाना बना रही है, जबकि प्रदेश के कई सरकारी स्कूल आज भी बदहाल हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या सरकार की इस नई व्यवस्था से मदरसों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों का भविष्य सच में बदलेगा, या फिर यह मुद्दा सिर्फ सियासी बयानबाजी तक ही सीमित रह जाएगा यह आने वाला समय बताएगा।