उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे है, जैसे जैसे चुनावी वर्ष नजदीक आ रहा है वैसे वैसे प्रदेश के सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी तैयारियों में जुट गए है. जिसके चलते शीर्ष नेताओ का आगमन भी प्रदेश में चुनावो से पहले होता नज़र आ रहा है. बीते दिनों देखा गया की प्रदेश की सियासत में धामी सरकार के चार वर्षो का सफर तय होने के बाद बड़े बड़े कार्यक्रम प्रदेशभर में आयोजित किये गए थे, भाजपा सरकार के इन कार्यक्रमों की बागडोर सँभालने के लिए केंद्रीय मंत्रियो का आगमन हुआ था, इन बड़े कार्यक्रमों में केंद्रीय गृह मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री द्वारा भाजपा सरकार की उपलब्धियो को जनता के बीच गिनवाने का काम किया गया था, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है की भाजपा ने आगामी चुनावो को देखते हुए अभी से अपनी जी जान लगा दी है, वही ऐसे में विपक्षी दल कहा पीछे हटने वाला है, लम्बे समय से प्रदेश की सियासत में अपनी जीत के ताज को निहारती कांग्रेस पार्टी भी अब विभिन्न माध्यमों से चुनावो में विजय होने की जद्दोजहद करती नज़र आने लगी है, जहाँ एक और भाजपा अपनी उपलब्धियों को जनता के बीच पहुंचाने के बाद लगातार अपने जीत के टारगेट को सेट करती दिखाई दे रही है वही कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल सरकार की कमियों को जनता को गिनवाने का काम कर रहे है. कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की नाकामियों को जनता से रूबरू कराने के लिए बड़े मंचो के माध्यम से कार्य करने जा रही है, जिसकी कमान सँभालने के लिए कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा का शीघ्र ही प्रदेश दौरा होने जा रहा है, आपको बता दे की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा इससे पहले भी कई बार प्रदेश दौरा कर चुकी है,हालही में प्रदेश के कुमाऊ मंडल का दौरा करने के बाद कुमारी शैलजा अब प्रदेश के गढ़वाल मंडल का दौरा करने जा रही है. कांग्रेस पार्टी के सभी नेताओं को प्रदेश प्रभारी के इस दौरे को लेकर उत्सुकता है. तो वही यह आस भी है की उनके इस दौरे के बाद निश्चित ही प्रदेश में कांग्रेस पार्टी को आगामी चुनावो को मध्यनज़र रखते हुए सकारात्मक ऊर्जा भी प्राप्त होगी,लेकिन वही सत्ता दल भाजपा कांग्रेस पार्टी की प्रदेश प्रभारी के इस दौरे को लेकर अपनी टिप्पणियां देती नज़र आ रही है, लेकिन कांग्रेस पीछे हटने का नाम नहीं ले रही है. जिसके चलते वर्तमान सरकार की नाकामियों को गिनवाने के साथ साथ अब कांग्रेस पार्टी ने सत्ता दल भाजपा के नेताओ की अंधरुनि आपसी कलह को भी मुद्दा बनाकर नया राग छेड़ दिया है, और प्रेसवार्ताओ के जरिये कांग्रेस पार्टी भाजपा नेताओ की अंधरुनि कलह पर चुटकी लेती नज़र आ रही है, जिसके बाद राजनितिक गलियारों में आपसी बहसबाज़ी देखने को मिलने लगी है और पक्ष विपक्ष के आरोप और प्रत्यारोप का सिलसिला भी बढ़ गया है,
प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है, सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं और शीर्ष नेताओं के दौरे और कार्यक्रमों से चुनावी माहौल अभी से बनने लगा है. जहाँ एक ओर धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर भाजपा ने प्रदेशभर में बड़े कार्यक्रम आयोजित किए, जिनकी कमान संभालने केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री पहुंचे और मंचों से सरकार की उपलब्धियां गिनाईं, इससे साफ है कि भाजपा ने चुनावी मोड में काम शुरू कर दिया है. तो वही दूसरी ओर कांग्रेस भी पीछे नहीं है, जिसके चलते कांग्रेस पार्टी सरकार की नाकामियां जनता के सामने लाने की रणनीति पर काम कर रही है, इसके लिए प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा जल्द गढ़वाल मंडल के दौरे पर आ रही हैं, यह इस साल उनका दूसरा दौरा होगा, हाल ही में वह कुमाऊं मंडल का दौरा कर चुकी हैं. उनके इस दौरे से कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि इस दौरे से संगठन को मजबूती और चुनावी ऊर्जा मिलेगी और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत होगी. वही भाजपा नेता कांग्रेस पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के दौरे पर तंज कस्ते नज़र आ रहे है, भाजपा का मानना है कि कुमारी शैलजा के दौरे से कोई प्रभाव नही पड़ने वाला साथ ही उनके प्रदेश दौरे के दौरान हमेशा कांग्रेस के नेताओं में आपसी खींचतान जरूर दिखाई देने लग जाती है, वही कुमारी शैलजा जितना प्रदेश दौरा करेगी उतना आपसी विवाद कांग्रेस के भीतर बनेगा और भाजपा के लिए रास्ता मुफीद बनता चला जायेगा।
जहाँ एक ओर भाजपा द्वारा कुमारी शैलजा के दौरे को लेकर कई प्रतिकिर्या सामने आ रही है, वही जवाब में कांग्रेस ने भाजपा की अंदरूनी कलह को मुद्दा बना लिया है, प्रेसवार्ता के जरिए कांग्रेस पार्टी भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान पर चुटकी लेती नज़र आ रही है.पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का तो ये भी मानना है की भाजपा में लोग गुस्से में है और बड़े नेता जल्द कांग्रेस में शामिल होने जा रहे है. भी हरीश रावत के बयान पर तंज कसती नजर आ रही है.
2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है. भाजपा अपनी उपलब्धियों का बखान कर रही है, तो कांग्रेस सरकार की नाकामियां गिना रही है, साथ ही दोनों पार्टियों के शीर्ष नेताओं के दौरे और तीखी बयानबाजी से आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, जिससे कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में यह तकरार और तेज होने के आसार हैं. बहरहाल, चुनावी रणभेरी बज चुकी है और चुनावों के नजदीक आते आते प्रदेश की जनता किस पार्टी की नीतियों को देखकर जीत का ताज़ पहनाने का काम करेगी यह देखना वाकई काफी दिलचस्प होने वाला है।