उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में बड़े अफसर पर कठोर कार्रवाई को लेकर धामी सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा फैसला लिया है.हरिद्वार जमीन घोटाले में करीब 54 करोड़ रुपए के लेनदेन प्रकरण पर सरकार ने IAS और पीसीएस अधिकारियों के साथ जिले के बाकी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं.दरअसल हाल ही में विजिलेंस ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी, जिसके बाद अब मामले में कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं. विजिलेंस रिपोर्ट में हरिद्वार जमीन प्रकरण को लेकर घोटाला होने की पुष्टि हुई है. इसके बाद अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों पर भी बड़ी कार्रवाई हुई है. जिसमे हरिद्वार में तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी IAS वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है.इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है.वहीं तीसरे बड़े अधिकारी पीसीएस अफसर अजय वीर की तीन वेतन वृद्धियों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं.दरअसल,यह घोटाला साल 2024 का है,लेकिन मामला साल 2025 में सामने आया.दरअसल, 2024 में हरिद्वार नगर निकाय चुनाव थे.और निकाय चुनाव के दौरान नगर निगम का पूरा सिस्टम यानी सभी अधिकारी तत्कालीन नगर आयुक्त IAS वरुण चौधरी नगर के पास थे.चुनाव के दौरान पूरे जिले में आचार संहिता लगी हुई थी,उस दौरान हरिद्वार नगर निगम ने 54 करोड़ रुपए में 33 बीघा जमीन खरीदी थी, जिसका खुलासा चुनाव के बाद साल 2025 में हुआ.मामले की जांच कराई गई तो सामने आया है, कि जो 33 बीघा जमीन 54 करोड़ रुपए में खरीदी गई है,उसके पास हरिद्वार नगर निगम का कूड़ा डंप होता है.ऐसे में उस जमीन की कीमत इतनी नहीं हो सकती है.साथ ही पता चला कि नगर निगम और कुछ प्रशासनिक अफसरों ने उस 33 बीघा कृषि भूमि को 143 में दर्ज कराया था.जिस पर धामी सरकार ने भ्रष्टाचार पर एक बड़ा ऐक्शन लिया है.विपक्षी दल इसमें भाजपा की सरकार पर ही दोष लगते नजर आ रहे है.
हरिद्वार जमीन घोटाला काफी चर्चाओं में रहा है.धामी सरकार के इस फैसले को बड़ा फैसला माना जा रहा है.ऐसा इसलिए क्योंकि पहले ही इस मामले में दो आईएएस अधिकारियों के अलावा एक पीसीएस और तमाम विभागीय अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है.अब विजिलेंस की जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई का फैसला भी ले लिया गया है. प्रकरण में अब विजिलेंस को मुकदमा दर्ज करने की भी अनुमति दे दी गई है.जबकि विपक्ष का मानना है.की ये घोटाला भी भाजपा की सरकार में हुआ है.जिसमें सम्भवतःबड़े राजनैतिक चेहरों बचाने के लिए अधिकारियो पर धामी सरकार की गाज गेरी गई है.
पूरा मामला सामने आया है, तो सीएम धामी ने भी एक्शन लिया और IAS अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को जांच की जिम्मेदारी सौंपी. प्राथमिक जांच में जमीन खरीद में गड़बड़ी सामने आई. इसके बाद सीएम धामी ने तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और हरिद्वार नगर निगम के तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित कर दिया गया था. इनके अलावा तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह समेत नगर निगम के कई अन्य कर्मचारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई थी.वहीं अब इस मामले में विजिलेंस जांच के बाद धामी सरकार ने आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की संस्तुति की है.जिससे धामी सरकार ने ये साफ कर दिया की भ्रष्टाचार पर ये ऐक्शन आगे भी जारी रहेगा।