दक्षिण 24 परगना में टीएमसी सांसद के कार्यालय पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने दखल दिया है। अदालत ने अगले आदेश तक इमारत को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश देते हुए तोड़फोड़ पर रोक लगा दी है।
Knews Desk- कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अमतला स्थित उनके कार्यालय को गिराने की कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। न्यायमूर्ति आरबी चौधरी की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि जुलाई के अंत तक कार्यालय की मौजूदा स्थिति में कोई बदलाव न किया जाए।
यह आदेश अभिषेक बनर्जी की कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिका में दावा किया गया था कि कार्यालय से जुड़ी जमीन के सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की।
कार्रवाई को लेकर टीएमसी और बीजेपी आमने-सामने
कार्यालय गिराए जाने के बाद पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान तेज हो गया। टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया कि मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद कार्रवाई की गई। पार्टी का कहना है कि तोड़फोड़ के दौरान कार्यालय का सामान भी ले जाया गया।
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पश्चिम बंगाल पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज और अन्य सामान हटाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला बताया।
प्रशासन ने अवैध निर्माण का लगाया आरोप
वहीं, जिला प्रशासन का कहना है कि अमतला-बारुईपुर रोड स्थित यह पांच मंजिला इमारत बिना जरूरी अनुमति और दस्तावेजों के बनाई गई थी। प्रशासन के मुताबिक, पहले संबंधित पक्ष को नोटिस देकर कागजात पेश करने को कहा गया था, लेकिन जवाब नहीं मिलने के बाद कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार, बुलडोजर और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में इमारत को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रशासन ने इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया है।
पहले भी उठा चुके हैं पुलिस पर सवाल
अभिषेक बनर्जी इससे पहले भी पार्टी कार्यालय पर कथित हमले को लेकर हाई कोर्ट का रुख कर चुके हैं। उनका आरोप रहा है कि पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही और राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। हालांकि, प्रशासन अपने कदम को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल कार्यालय पर किसी भी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जा सकेगी। मामले की अगली सुनवाई तक सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।