यूपी बीजेपी की नई उपाध्यक्ष पूजा पाल: पति की हत्या के बाद नहीं टूटीं, धमकियों के बीच लड़ीं न्याय की लड़ाई

Knews Desk- उत्तर प्रदेश भाजपा ने हाल ही में पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। उनका राजनीतिक सफर किसी विरासत का नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और न्याय की लंबी लड़ाई का प्रतीक माना जाता है। पति की हत्या के बाद मिली धमकियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

पूजा पाल की जिंदगी 25 जनवरी 2005 को पूरी तरह बदल गई, जब प्रयागराज पश्चिमी सीट से बसपा विधायक रहे उनके पति राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। उस समय उनकी शादी को महज नौ दिन हुए थे। इस घटना ने एक सामान्य गृहिणी को न्याय की लड़ाई लड़ने वाली महिला नेता बना दिया।

राजू पाल की हत्या के बाद हुए उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने पूजा पाल को उम्मीदवार बनाया। पहली बार चुनाव लड़ते हुए उनका मुकाबला अतीक अहमद के भाई अशरफ से हुआ। हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने राजनीति से दूरी नहीं बनाई।

लगातार दो बार प्रयागराज पश्चिमी से बनीं विधायक

2007 के विधानसभा चुनाव में पूजा पाल ने दोबारा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा पहुंचीं। इसके बाद 2012 के चुनाव में उन्होंने फिर जीत हासिल की। इस बार उनके सामने खुद अतीक अहमद चुनाव मैदान में था, लेकिन पूजा पाल ने उसे भी पराजित कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।

2017 के विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2022 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर तीसरी बार विधायक बनीं। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।

धमकियों के बावजूद नहीं छोड़ी कानूनी लड़ाई

राजू पाल हत्याकांड की सुनवाई के दौरान पूजा पाल ने कई बार आरोप लगाया कि उन्हें गवाही न देने और मुकदमा वापस लेने के लिए लगातार धमकियां दी गईं। उनका कहना था कि परिवार को खत्म करने तक की चेतावनी दी गई, लेकिन उन्होंने किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया और न्याय की लड़ाई जारी रखी।

19 साल बाद मिला इंसाफ

करीब 19 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 29 मार्च 2024 को लखनऊ स्थित सीबीआई अदालत ने राजू पाल हत्याकांड में सात दोषियों को हत्या, साजिश और अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसला आने से पहले इस मामले के प्रमुख आरोपी अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की मौत हो चुकी थी। फैसले के बाद पूजा पाल ने इसे न्याय की जीत बताया।

पूजा पाल ने उत्तर प्रदेश में माफिया के खिलाफ कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की खुलकर सराहना की थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से बाहर कर दिया। बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

भाजपा ने संगठन में भरोसा जताते हुए पूजा पाल को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। पति की हत्या से लेकर न्याय की लड़ाई, चुनावी संघर्ष और अब संगठन में अहम जिम्मेदारी तक का उनका सफर उन्हें प्रदेश की चर्चित महिला नेताओं में शामिल करता है।