महिला आरक्षण बिल पर रार, स्मृति ईरानी ने साधा विपक्ष पर निशाना, कहा- महिलाओं के साथ हुआ धोखा

डिजिटल डेस्क- महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन बिल के गिरने के बाद विपक्ष जश्न मना रहा है, जो “महिलाओं के साथ धोखा” है। स्मृति ईरानी ने कहा कि जिन महिलाओं ने वर्षों तक राजनीति में संघर्ष किया है, उनके अधिकारों को रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस बात का जश्न मना रहे हैं कि महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि “जो लोग कल संसद में ताली बजा रहे थे और हंस रहे थे, उन्हें देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी।

298 पड़े पक्ष में, जबकि 230 सांसदों ने इसका किया विरोध

दरअसल, शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं किया जा सका। इस विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया था, लेकिन 352 वोटों की आवश्यक सीमा सरकार पार नहीं कर सकी, जिससे बिल गिर गया। स्मृति ईरानी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह 98 साल पुराने महिला सशक्तिकरण के “दावे” का श्रेय लेती रही है, लेकिन उसे जमीन पर लागू करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि संसद की हालिया घटना ने विपक्ष के असली इरादों को उजागर कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण की विरोधी रही हैं और अब ऐतिहासिक योगदान का श्रेय लेने की कोशिश कर रही हैं। स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि गांधी-नेहरू परिवार नहीं चाहता कि देश की सामान्य और गरीब महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ें और सत्ता में भागीदारी करें।

महिलाओं के हितों की रक्षा करना चाहता है विपक्ष तो सरकार का करे समर्थन

उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में दक्षिणी राज्यों और महिलाओं के हितों की रक्षा करना चाहता था, तो उसे सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लोकसभा की सीटें बढ़ाकर महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात आई, तो विपक्ष ने उसे स्वीकार क्यों नहीं किया। स्मृति ईरानी ने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक हिस्सेदारी देना है, जबकि साथ ही पुरुष प्रतिनिधित्व के साथ संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रस्ताव के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर राजनीति की दिशा ही बदल दी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मुद्दा केवल एक कानून का नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और उनके राजनीतिक अधिकारों का है। स्मृति ईरानी के अनुसार, विपक्ष की भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि वह महिलाओं को सत्ता में बराबरी का अवसर देने के पक्ष में नहीं है।

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