महिला आरक्षण बेनाम परिसीमन !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, प्रदेश में अब राजनीतिक जवाबी हमले के तौर पर भारतीय जनता पार्टी और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगियों ने विपक्ष को निशाना बनाते हुए एक बड़े देशव्यापी विरोध अभियान की घोषणा की है. यह ऐलान संविधान 131 वां संशोधन विधेयक, 2026 के लोकसभा में पारित न हो पाने के बाद लिया गया. यह विधेयक अनिवार्य दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था. पार्टी के शीर्ष सूत्रों के अनुसार बीजेपी ने अपनी राज्य इकाइयों को पूरे भारत में सभी जिला मुख्यालयों पर समन्वित प्रदर्शन आयोजित करने का निर्देश दिया है.इस अभियान का उद्देश्य लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग को रोकने में विपक्ष की भूमिका को बेनकाब करना है. इन विरोध प्रदर्शनों का लक्ष्य विधेयक के पक्ष में जनमत जुटाना और विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करना है.जिसके लेकर अब उत्तराखंड में भी राजनीति बेहद तेज हो गई है, आपको बता दे 2027 में विधानसभा चुनाव होने है.ऐसे में सत्ता पक्ष ने विपक्षी दलों को घेरने के लिए बड़ा जन आंदोलन प्रदेश भर में छेड़ने का मन बना लिया है. इसका उद्देश्य यही है की कांग्रेस सहित अन्य दलों की भूमिका से लोकसभा में नारी सशक्ति अधिनियम बिल सदन में गिर गया है, जिससे यह प्रतीत होता है कि विपक्ष महिलाओं के हित के बारे में कितने सचेत है. दरअसल आपको बता दे, परिसीमन विधेयक 2026 महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित है. वही महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पारित हो चुका है.इसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है. लेकिन, इसे लागू करने के लिए नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था. जिसके लिए ही ये परिसीमन विधेयक 2026 सरकार 3 दिवसीय विशेष सत्र में लेकर आई,जिससे अनुमान लगाया जा रहा थ कि नया परिसीमन लागू होने से देश का राजनीतिक नक्शा बदल जायेगा, जिसमे लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव किया गया था. इसमें राज्यों की सीटें 530 से बढ़ाकर 815 और केंद्र शासित प्रदेशों की सीटें 20 से बढ़ाकर 35 करने की बात कही गई थी. यानी अब तक केंद्र में सत्ता के लिए जो बहुमत का आंकड़ा 272 का था, वह 426 हो सकता था. लेकिन विपक्षी दलों का समर्थन न मिलने से राजनीतिक माहौल कही न कही गरमा गया है.

प्रदेश और देश के लिए कल का बीता दिन बेहद चर्चाओं में रहा, वजह यही थी की भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में व्यापक जन जागरण अभियान चलाया. जिसमें पदयात्रा, स्कूटी रैली और मानव श्रृंखला के जरिए लोगों को जागरूक किया गया.बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली.हर कोई इस पल को लेकर बेहद उत्सुक था.सभी दलों ने इसका समर्थन भी किया लेकिन अब इस मामले पर जम कर राजनीति हो रही है,दरअसल, ये पूरा मामला परिसीमन से जुड़ा हुआ सामने आ रहा है यही वजह है कि जहां एक और बीजेपी विपक्षी दलों पर समर्थन न देने का आरोप लगा रही है. तो वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इस बात को कह रही है कि महिला आरक्षण बिल साल 2023 में पारित हो चुका है ऐसे में इस संशोधन के जरिए सरकार परिसीमन पर जोर दे रही है जबकि विपक्ष महिला आरक्षण बिल के समर्थन में है।

कल देश की संसद में संग्राम देखने को मिला जहां महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरा उसके बाद से आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी हो गया, सत्ता पक्ष विपक्षी दलों पर आरोप लगाता नजर आ रहा है तो वही कांग्रेस का मानना है की भाजपा महिलाओं को बेवकूफ न समझे महिलाएं सब कुछ देख रही है. कुछ सरकार ने ठोस करना है तो आप 2023 में जो सर्व सहमति से जो विधेयक पारित हुआ था सभी दलों ने उसका समर्थन किया था, अगर उसमें कुछ ऐसा संशोधन करना है तो आप करिए और महिलाओं को उनका हक दीजिए अभी दीजिए, लेकिन उसको दूसरी चीजों के साथ अटैच करके गुमराह करने की कोशिश न करें कांग्रेस तैयार है और बिल को लेकर सहमत है. 

 

आपको बता दे, देश में अब तक कुल 4 बार परिसीमन हुआ है. इसके लिए आयोग का गठन किया गया. अब ये 5वीं बार होने जा रहा था. सबसे पहला परिसीमन 1952 में हुआ था. अंतिम परिसीमन 2001 की जनगणना के आधार पर 2002 में हुआ था. दरअसल, 1976 में 42वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से 2001 तक परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी, ताकि जनसंख्या नियंत्रण के प्रयासों को झटका न लगे.वही आपको बता दे, ये पूरा मामला परिसीमन से जुड़ा हुआ है यही वजह है कि जहां एक और बीजेपी विपक्षी दलों पर समर्थन न देने का आरोप लगा रही है। तो वहीं, दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस इस बात को कह रही है कि महिला आरक्षण बिल साल 2023 में पारित हो चुका है ऐसे में इस संशोधन के जरिए सरकार परिसीमन पर जोर दे रही है जबकि विपक्ष महिला आरक्षण बिल के समर्थन में है।ऐसे में देखना होगा कि आम जनता इसकी बारीकियों को कितना ध्यान से समझ पायेगी या ये मुद्दा राजनीतिक समुद्र में जनता को गुमराह करने में काफी रहेगा।

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