तेलंगाना-बिहार की तर्ज पर हो जाति जनगणना, राहुल-खरगे ने PM मोदी से की प्रक्रिया बदलने की मांग

Knews Desk: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना की प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। दोनों नेताओं ने मौजूदा ‘ओपन-एंडेड’ तरीके पर चिंता जताते हुए मांग की है कि जातियों की सही संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए जनगणना की प्रक्रिया में बदलाव किया जाए।

राहुल गांधी और खरगे ने पत्र में कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए देश में अलग-अलग जातियों और समुदायों की वास्तविक आबादी का सटीक आंकड़ा जरूरी है। उनके मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में व्यक्ति से उसकी जाति का नाम सीधे पूछकर दर्ज किया जाएगा, जिससे एक ही जाति अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से दर्ज हो सकती है।

कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि ऐसा होने पर एक ही जाति कई अलग-अलग नामों में बंट सकती है और जातियों की संख्या वास्तविकता से कहीं ज्यादा दिखाई देगी। इससे जातिगत आंकड़ों का विश्लेषण मुश्किल होगा और सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का सही आकलन भी नहीं हो पाएगा।

ओबीसी की सही आबादी सामने आने पर भी सवाल

पत्र में राहुल गांधी और खरगे ने कहा कि अगर किसी समुदाय की संख्या ही सही तरीके से दर्ज नहीं होगी तो उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन भी प्रभावित होगा। इसका असर शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों पर पड़ सकता है।

दोनों नेताओं ने विशेष रूप से ओबीसी की आबादी के आंकड़े को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना है कि मौजूदा प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग से जुड़ा स्पष्ट विकल्प नहीं होने के कारण देश में ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने आने में परेशानी हो सकती है।

ड्रॉप-डाउन सूची बनाने का सुझाव

कांग्रेस नेताओं ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार ड्रॉप-डाउन सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। इसके तहत जनगणना फॉर्म या डिजिटल ऐप में आधिकारिक तौर पर मान्य जातियों के नाम उपलब्ध होंगे और गणनाकर्ता संबंधित व्यक्ति की जाति के अनुसार सूची में से विकल्प चुन सकेगा।

राहुल गांधी और खरगे का कहना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में भी इसी तरह की व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि जातियों की सूची सरकारी रिकॉर्ड, सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की सूचियों और भारतीय मानवशास्त्रीय सर्वेक्षण जैसे आधिकारिक स्रोतों के आधार पर तैयार की जा सकती है।

तेलंगाना और बिहार का दिया उदाहरण

कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र में तेलंगाना और बिहार में किए गए जाति सर्वेक्षणों का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि इन राज्यों में जातियों की पहचान के लिए सूची आधारित प्रक्रिया अपनाई गई थी। दोनों नेताओं ने अपने पत्र के साथ इन राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई जाति सूचियां भी संलग्न की हैं।

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से मौजूदा प्रश्नावली को वापस लेने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों तथा अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद नई प्रश्नावली तैयार करने की मांग की है। उनका कहना है कि जाति जनगणना ऐसी होनी चाहिए जिससे देश के सभी जातियों और समुदायों की संख्या का विश्वसनीय आंकड़ा सामने आए और उसका इस्तेमाल सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियां बनाने में किया जा सके।

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