KNEWS DESK- भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आने वाले दिनों में आम लोगों की चिंता बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारत के लिए अहम इंडियन बास्केट क्रूड भी 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, 8 सितंबर को इंडियन बास्केट की कीमत 100.75 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। इससे पहले शुक्रवार को भी इसकी कीमत 101 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी।
कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच देखने को मिल रही है। जानकारों के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक इसी स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर आने वाले महीनों में घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार
इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची है। अप्रैल में इसकी औसत कीमत 114.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जबकि मई में यह 106.23 डॉलर प्रति बैरल रही थी।
इसके बाद जून, जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की औसत कीमत क्रमशः 83.22 डॉलर, 82.04 डॉलर और 90.19 डॉलर प्रति बैरल रही। जुलाई के मुकाबले मौजूदा कीमत में करीब 23 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। यानी कुछ ही समय में इंडियन बास्केट क्रूड करीब 18 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ है।
क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कब और कितना पड़ेगा। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, अगर सितंबर के पूरे महीने में इंडियन बास्केट की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो अक्टूबर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कच्चे तेल के बाजार में काफी अनिश्चितता बनी हुई है। मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन भारत की कच्चे तेल की सप्लाई में फिलहाल कोई बड़ी बाधा नहीं है। भारत के पास पहले की तुलना में अधिक सप्लायर भी मौजूद हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेल महंगा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि अमेरिकी क्रूड करीब 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। सऊदी अरब की जिजान रिफाइनरी पर हुए हालिया हमले से भी तेल बाजार में चिंता बढ़ी है। इस रिफाइनरी की रोजाना करीब 4 लाख बैरल कच्चा तेल प्रोसेस करने की क्षमता बताई जाती है।
इसके अलावा होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के रुख ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। ईरान की ओर से नए शिपिंग कॉरिडोर की बात कही गई है, जिससे इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में अगर मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।