बोरीवली बेस्ट बस डिपो विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा एक्शन, BMC पर 5 लाख रुपये का लगाया जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने और बस डिपो शुरू करने में देरी पर मुंबई नगर निगम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है।

KNEWS DESK- मुंबई के बोरीवली स्थित बेस्ट बस डिपो की जमीन को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) और एक निजी डेवलपर के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नगर निगम की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए सख्त कदम उठाए हैं। 3 नवंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान बीएमसी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके साथ ही नगर निगम आयुक्त अश्विनी भिड़े को अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और आयुक्त तथा उनके कर्मचारियों के वेतन वितरण को निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, बोरीवली में सार्वजनिक बेस्ट बस डिपो स्थापित करने के लिए एक भूखंड आरक्षित किया गया था। हालांकि, जमीन के कब्जे और उसके इस्तेमाल को लेकर मुंबई नगर निगम और निजी डेवलपर के बीच कानूनी विवाद शुरू हो गया। अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्देश देते हुए संबंधित निजी डेवलपर को भूखंड का खाली और शांतिपूर्ण कब्जा बीएमसी को सौंपने को कहा था। कोर्ट ने साइट पर मौजूद प्रशासनिक भवन का कब्जा भी नगर निगम को देने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी को तीन महीने के भीतर जमीन पर कब्जा लेने और संबंधित स्थल से शेष अतिक्रमण कानूनी प्रक्रिया के तहत हटाने की समय सीमा दी थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बोरीवली में बेस्ट बस डिपो पूरी क्षमता के साथ शुरू हो सके। हालांकि, निर्धारित समय सीमा बीतने के बावजूद नवंबर 2025 तक अतिक्रमण पूरी तरह नहीं हटाया जा सका।

इस देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम के कामकाज पर नाराजगी जताई। अदालत के निर्देशों के बावजूद जमीन से अतिक्रमण हटाने और बस डिपो शुरू करने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का मामला गंभीर हो गया। बीएमसी ने अतिक्रमण हटाने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया।

बोरीवली बेस्ट बस डिपो का मामला केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन सुविधा को शुरू करने से भी जुड़ा है। डेवलपर से जमीन मिलने के बाद भी अतिक्रमण हटाने और बस डिपो को पूरी क्षमता से संचालित करने की चुनौती बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब बीएमसी पर अदालत के निर्देशों का पालन करने और लंबित कार्रवाई पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।

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