Knews Desk- अमेरिका में आज मिडटर्म इलेक्शन के चुनाव परिणाम आने आरम्भ हो गए हैं। सामान्यतः भारतीय यहाँ डेमोक्रेट समर्थक माने जाते हैं। मोदी जी ने यहाँ ट्रम्प के पक्ष में ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार’ का नारा देकर अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति और सामान्य शिष्टाचार का उल्लंघन किया। इसकी लंबे समय अमेरिका में रह रहे भारतीयों ने क़ीमत भी चुकाई और अभी भी चुका रहे हैं। कुछ वर्षों की खींचतान के बाद अमेरिका में रहने वाले भारतीय फिर से डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर झुकाव रखते हैं।भारतीय मूल के लोगों की जनसंख्या यहाँ दो प्रतिशत भी नहीं है, इसलिए चुनाव में उनकी विशेष दख़लंदाज़ी नहीं होती। फिर भी भारतीय मूल के कुछ नेता यहाँ मौजूद हैं। भारतीय समृद्ध हैं और दिमाग़दार हैं, इसलिए राजनीति में भी अपने नंबर के अनुपात में ज़्यादा सफल हैं।
आज जो उपचुनाव हुए, उनमें सबसे महत्वपूर्ण ओहियो के गवर्नर पद पर रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी का चुनाव था। यह सीट रिपब्लिकन की जीती हुई मानी जाती थी। लेकिन विवेक ने अपनी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ ऐन मौके पर एक घिनौना विज्ञापन लॉन्च किया, जिससे काफ़ी रिपब्लिकन भी विवेक के ख़िलाफ़ आ गए। ताजा समाचार मिलने तक विवेक चुनाव हार चुके हैं।इसके अतिरिक्त, ज्यादातर भारतीय मूल के नेता डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। इनमें रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, एमी बेरा, पिया डांडिया, सुहास सुब्रमण्यम और आमिष शाह शामिल हैं। ये छह लोग हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव में या तो जीत गए हैं या जीतने वाले हैं। हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव को यहाँ की संसद का निम्न सदन कहा जा सकता है। इसमें 435 सदस्य होते हैं।
भारतीय मूल से अभी तक कोई अमेरिकन सीनेटर नहीं बना है। कमला हैरिस अर्ध भारतीय मूल की एकमात्र सीनेटर हैं। वैसे, इस बार अमेरिकन सीनेट में पहली बार कोई मुस्लिम सीनेटर बन रहा है। अब्दुल एल सईद के मिशिगन से सीनेटर का चुनाव जीतने की पूरी संभावना है। माइनॉरिटी—मुस्लिम, हिंदू, ब्लैक और मैक्सिकन—इन सबकी पार्टी डेमोक्रेटिक मानी जाती है, इसलिए अब्दुल भी डेमोक्रेटिक पार्टी से ही हैं।इन सबसे अलग, मेरे अपने प्रदेश टेक्सास में ऑस्टिन से इस बार पूजा सेठी डेमोक्रेटिक पार्टी से विधायक बन रही हैं। वह टेक्सास की धरती पर पहली भारतीय मूल की विधायक हैं।