Knews Desk- अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने के बाद ट्रंप ने ईरान और इजराइल को लेकर अहम घोषणाएं की हैं। फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका की फिलहाल ईरान पर हमला करने की कोई योजना नहीं है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता जारी है और इसकी तारीख जल्द तय की जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, बातचीत के नतीजे सामने आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है और दोनों पक्ष यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि इसका क्या परिणाम निकलता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने के बीच ईरान के साथ संभावित टकराव को लेकर ट्रंप का रुख नरम दिखाई दे रहा है।इससे पहले सोमवार, 2 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर हमला किया था। यह कार्रवाई मिडटर्म चुनाव के लिए प्रस्तावित मतदान से ठीक पहले हुई थी। हालांकि, चुनावी नतीजों में रिपब्लिकन पार्टी को इसका कोई स्पष्ट राजनीतिक फायदा मिलता दिखाई नहीं दिया। उपलब्ध आकलन के मुताबिक, रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में बहुमत गंवाने का खतरा है, जबकि सीनेट में भी उसे नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में ट्रंप के लिए अपनी नीतियों को आगे बढ़ाना पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ट्रंप ने इजराइल को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इजराइल के प्रधानमंत्री को इस फैसले की जानकारी दे दी गई है और अमेरिका अब इजराइल को सालाना चार अरब डॉलर की आर्थिक सहायता नहीं देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका इजराइल को हथियार बेच सकता है। इस घोषणा से दोनों देशों के संबंधों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी नीति को लेकर चर्चा तेज हो सकती है।ट्रंप के इन फैसलों के पीछे कई राजनीतिक और आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर महंगाई का असर पड़ा है। ईरान के साथ युद्ध और उससे जुड़ी परिस्थितियों के कारण अमेरिकी नागरिकों को बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई मिडटर्म चुनाव में एक प्रमुख मुद्दा रही और ट्रंप प्रशासन पर इसे नियंत्रित करने का दबाव बना रहा।
इसके अलावा, यदि कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण स्थापित होता है, तो ट्रंप के फैसलों की समीक्षा और उनकी नीतियों पर निगरानी बढ़ सकती है। ऐसे में किसी नए युद्ध की शुरुआत करना उनके लिए राजनीतिक रूप से कठिन हो सकता है। इजराइल की आंतरिक राजनीतिक स्थिति भी अमेरिकी नीति को प्रभावित करने वाला एक पहलू मानी जा रही है।कुल मिलाकर, मिडटर्म चुनाव के बाद ट्रंप के ईरान और इजराइल को लेकर दिए गए बयानों ने अमेरिकी विदेश नीति की दिशा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, ईरान के साथ बातचीत का अंतिम परिणाम और इजराइल को आर्थिक सहायता रोकने के फैसले का वास्तविक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।