KNEWS DESK- जीभ और मुंह की सेहत का संबंध सिर्फ दांतों और मसूड़ों तक सीमित नहीं है। खराब ओरल हेल्थ के कारण शरीर में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है, जिसका असर दिल की सेहत पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंह में मौजूद बैक्टीरिया रक्तप्रवाह के जरिए हृदय तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में हार्ट वाल्व को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जीभ की नसों का दिल से सीधा कनेक्शन होता है और मुंह की सफाई में लापरवाही कितनी गंभीर साबित हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। साल 2022 में इन बीमारियों के कारण लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। इनमें से करीब 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। ऐसे में दिल की सेहत बनाए रखने के लिए खानपान, शारीरिक गतिविधि और अन्य जरूरी आदतों के साथ-साथ ओरल हेल्थ पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है।
जीभ और दिल का क्या है कनेक्शन?
जीभ की नसों का दिल से कोई सीधा शारीरिक कनेक्शन नहीं होता, जिसके जरिए जीभ का संक्रमण सीधे हृदय तक पहुंच जाए। हालांकि, जीभ, दांतों और मसूड़ों की सेहत शरीर के समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। मुंह में संक्रमण या मसूड़ों की गंभीर बीमारी होने पर कुछ बैक्टीरिया रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। विशेष रूप से कुछ लोगों में ये बैक्टीरिया हृदय की अंदरूनी परत या वाल्व तक पहुंचकर गंभीर संक्रमण पैदा कर सकते हैं।
दिल की धड़कन और शरीर के कई अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करने में वेगस नर्व की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह मस्तिष्क से निकलकर गर्दन, छाती और पेट के कई अंगों तक जाती है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि जीभ की मांसपेशियां सीधे दिल से जुड़ी हैं या जीभ में होने वाला हर संक्रमण हृदय को नुकसान पहुंचाता है।
खराब ओरल हेल्थ से दिल को कैसे हो सकता है नुकसान?
नवजीवन हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. प्रवीण कुमार के मुताबिक, ओरल हेल्थ का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। मुंह में संक्रमण होने पर बैक्टीरिया रक्तप्रवाह के जरिए हृदय तक पहुंच सकते हैं और कुछ मामलों में हृदय के वाल्व को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए दांतों, मसूड़ों और जीभ की नियमित सफाई करना जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, मसूड़ों की बीमारी और हृदय संबंधी समस्याओं के बीच संबंध को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं। हालांकि, दोनों के बीच संबंध पाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि खराब ओरल हेल्थ सीधे तौर पर हर व्यक्ति में हार्ट अटैक का कारण बनती है। हृदय रोगों के पीछे धूम्रपान, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक निष्क्रियता और अन्य जोखिम कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीभ पर मौजूद बैक्टीरिया क्या बताते हैं?
जीभ की सतह पर कई प्रकार के सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, जो मुंह के सामान्य माइक्रोबायोम का हिस्सा हैं। कुछ शोधों में जीभ पर मौजूद सूक्ष्मजीवों और हृदय के स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंध सामने आए हैं।
हेल्थलाइन में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, एक अध्ययन में कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (CHF) से पीड़ित लोगों की जीभ पर मौजूद सूक्ष्मजीवों की तुलना स्वस्थ लोगों के सूक्ष्मजीवों से की गई। शोधकर्ताओं ने दोनों समूहों के माइक्रोबायोम में अंतर पाया। हालांकि, इस तरह के निष्कर्षों से यह साबित नहीं होता कि जीभ पर मौजूद बैक्टीरिया ही हार्ट फेलियर का कारण हैं। इस संबंध को बेहतर तरीके से समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।
ओरल हेल्थ को बेहतर रखने के लिए क्या करें?
मुंह और दांतों को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों को अपनाना जरूरी है। दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से कम से कम दो मिनट तक ब्रश करें। दांतों के साथ जीभ की भी हल्के हाथों से सफाई करें, ताकि उसकी सतह पर जमा गंदगी और बैक्टीरिया कम हो सकें।
दांतों के बीच फंसे भोजन के कणों को निकालने के लिए रोजाना फ्लॉस या इंटरडेंटल क्लीनर का इस्तेमाल करें। जरूरत के अनुसार डेंटिस्ट की सलाह से माउथवॉश का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह ब्रशिंग और फ्लॉसिंग का विकल्प नहीं है। टूथब्रश के ब्रिसल्स खराब होने पर उसे बदलें और सामान्यतः हर तीन से चार महीने में नया ब्रश इस्तेमाल करें।
इसके अलावा, नियमित रूप से डेंटिस्ट से जांच करवाएं। मसूड़ों से बार-बार खून आना, सूजन, लगातार मुंह से बदबू आना, दांतों में दर्द या मुंह में ऐसे घाव होना जो ठीक नहीं हो रहे हैं, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। यदि मुंह में कोई छाला या घाव दो सप्ताह तक ठीक न हो, तो डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच करवाएं।
कब बरतें विशेष सावधानी?
जिन लोगों को पहले से हृदय के वाल्व की बीमारी है, कृत्रिम हार्ट वाल्व लगा है या जिन्हें हृदय के संक्रमण का अधिक जोखिम है, उन्हें ओरल हेल्थ को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे लोगों को डेंटिस्ट को अपनी हृदय संबंधी स्थिति के बारे में बताना चाहिए, ताकि जरूरत के अनुसार उचित सलाह दी जा सके।
कुल मिलाकर, जीभ और दिल के बीच सीधा शारीरिक संबंध नहीं है, लेकिन मुंह की सेहत का असर शरीर के दूसरे अंगों पर पड़ सकता है। नियमित ब्रशिंग, जीभ की सफाई, फ्लॉसिंग और समय-समय पर डेंटल चेकअप से ओरल हेल्थ को बेहतर रखा जा सकता है। दिल को स्वस्थ रखने के लिए ओरल हाइजीन के साथ संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और हृदय रोगों के अन्य जोखिम कारकों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी है।