KNEWS DESK- गर्मी का मौसम आते ही जिस फल का इंतजार सबसे ज्यादा किया जाता है, वह है आम। स्वाद, सुगंध और मिठास से भरपूर यह फल भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में बेहद लोकप्रिय है। यही वजह है कि हर साल 22 जुलाई को नेशनल मैंगो डे मनाया जाता है। इस दिन आम के इतिहास, उसकी विभिन्न किस्मों और पोषण संबंधी खूबियों के बारे में लोगों को जागरूक किया जाता है।
भारत को आम का सबसे बड़ा उत्पादक देश माना जाता है। दुनिया में होने वाले कुल आम उत्पादन का लगभग आधा हिस्सा अकेले भारत में उगाया जाता है। दशहरी, अल्फांसो, केसर, हिमसागर, चौसा और लंगड़ा जैसी कई किस्में देशभर में खूब पसंद की जाती हैं। इनमें चौसा और लंगड़ा आम के नाम हमेशा लोगों की जिज्ञासा का कारण बने रहते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, आम की खेती की शुरुआत दक्षिण एशिया में हुई थी और भारत में इसका इतिहास करीब 5 हजार वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से ही यह फल भारतीय संस्कृति और खानपान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। माना जाता है कि सबसे पहले उत्तर-पूर्व भारत में आम की खेती की गई थी। समय के साथ यह देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गया। बाद में पुर्तगाली व्यापारियों ने इसे दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाया, जहां इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
कैसे बना भारत का राष्ट्रीय फल?
आम को भारत का राष्ट्रीय फल माना जाता है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी व्यापक खेती और भारतीय संस्कृति में इसकी विशेष पहचान है। देश के लगभग हर राज्य में अलग-अलग किस्मों के आम उगाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी, बिहार का जर्दालू, महाराष्ट्र का अल्फांसो, गुजरात का केसर, पश्चिम बंगाल का हिमसागर और आंध्र प्रदेश का बंगनपल्ली देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी खास पहचान रखते हैं। केरल के कन्नूर जिले को तो आम की विविध प्रजातियों के लिए विशेष पहचान मिली हुई है।
लंगड़ा आम के नाम की कहानी
लंगड़ा आम उत्तर भारत की सबसे लोकप्रिय किस्मों में से एक है। इसके नाम को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। लोककथाओं के अनुसार, जिस व्यक्ति ने सबसे पहले इस किस्म की खेती की थी, वह शारीरिक रूप से दिव्यांग था। लोगों ने जब इस आम के बारे में पूछना शुरू किया तो इसे उस किसान की पहचान से जोड़कर “लंगड़ा आम” कहा जाने लगा। हालांकि, इस कहानी के ऐतिहासिक प्रमाण स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन यह किस्सा आज भी लोगों के बीच काफी प्रसिद्ध है।
चौसा आम का नाम क्यों पड़ा?
चौसा आम के नाम का संबंध इतिहास से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि 1539 में बिहार के चौसा क्षेत्र में शेरशाह सूरी ने मुगल सम्राट हुमायूं को युद्ध में पराजित किया था। जीत के बाद आयोजित उत्सव में जिस विशेष आम का स्वाद लिया गया, उसे उसी स्थान के नाम पर “चौसा” कहा जाने लगा। आज चौसा आम अपनी मिठास, रस और सुगंध के लिए देशभर में बेहद पसंद किया जाता है।
आम सिर्फ फल नहीं, भारतीय संस्कृति का हिस्सा
आम केवल स्वाद का ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक अनुष्ठानों में आम के पत्तों का उपयोग शुभ माना जाता है। वहीं, गर्मियों में आम से बनने वाले शेक, आइसक्रीम, अचार, पन्ना और मिठाइयां लोगों की पहली पसंद रहती हैं।
नेशनल मैंगो डे का उद्देश्य भी इसी खास फल की विरासत, विविधता और महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। यही कारण है कि आम को फलों का राजा कहा जाता है और इसकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।