अयोध्या राम मंदिर में पारदर्शिता पर जोर, चढ़ावा गिनने का सिस्टम पूरी तरह बदला

KNEWS DESK- अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर की सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में कार्यरत सभी 349 कर्मचारियों की व्यापक स्क्रीनिंग शुरू कर दी है। इसके साथ ही चढ़ावे की गणना की पूरी व्यवस्था में भी अहम बदलाव किए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

ट्रस्ट के अनुसार, कर्मचारियों की स्क्रीनिंग प्रक्रिया केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें प्रत्येक कर्मचारी के कार्य, जिम्मेदारियों, सेवा रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर प्रशासन से जुड़े सभी कर्मचारी निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं तथा सुरक्षा और जवाबदेही के सभी पहलुओं का पालन किया जा रहा है।

चढ़ावे की गिनती व्यवस्था में बड़ा बदलाव

चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद सबसे बड़ा बदलाव मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ मिलकर नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत अब तक चढ़ावे की गिनती में लगे 36 कर्मचारियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।

नई व्यवस्था के अनुसार, अब मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे की गिनती केवल एसबीआई द्वारा अधिकृत और नियुक्त कर्मचारियों की निगरानी में होगी। ट्रस्ट का मानना है कि बैंक की पेशेवर प्रणाली अपनाने से पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनेगी। इससे चढ़ावे की गणना में मानवीय त्रुटियों या किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका भी काफी हद तक कम होगी।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और करोड़ों रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। ऐसे में चढ़ावे के प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय होना बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने निगरानी व्यवस्था को भी और सख्त बनाने का निर्णय लिया है।

सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों की स्क्रीनिंग के दौरान उनकी जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन भी किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव भी किया जा सकता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सके।

श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखना प्राथमिकता

ट्रस्ट का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर प्रशासन की जिम्मेदारी केवल व्यवस्थाओं का संचालन करना ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को भी बनाए रखना है। इसी कारण चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से चढ़ावे की गणना, कर्मचारियों की विस्तृत स्क्रीनिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे फैसले मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

भविष्य में अनियमितताओं पर लगेगी रोक

ट्रस्ट को उम्मीद है कि इन नए बदलावों से भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, लापरवाही या सुरक्षा संबंधी चूक की संभावना काफी कम हो जाएगी। साथ ही, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और नकद राशि के प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता पहले से अधिक मजबूत होगी।

मंदिर प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाते रहेंगे। ट्रस्ट का उद्देश्य केवल किसी एक घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे और श्रद्धालुओं का विश्वास लगातार मजबूत बना रहे।

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