Knews Desk– डेंगू को आमतौर पर तेज बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द और कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है. ज्यादातर मरीज उचित आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और डॉक्टर की सलाह से ठीक हो जाते हैं. लेकिन कुछ मामलों में डेंगू गंभीर रूप ले सकता है. खासतौर पर लगातार उल्टी, तेज सिरदर्द, पेट में दर्द या खून आने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.डेंगू में मतली और कभी-कभी उल्टी होना आम लक्षण हो सकता है. लेकिन अगर मरीज को बार-बार उल्टी हो रही है, पानी या दूसरे तरल पदार्थ भी शरीर में नहीं रुक रहे हैं या उल्टी लगातार बढ़ रही है, तो इसे सामान्य लक्षण नहीं माना जाना चाहिए. लगातार उल्टी से शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है, जिससे मरीज की कमजोरी और डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है.
यथार्थ हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन डॉ. प्रखर गर्ग के मुताबिक, डेंगू में हर बार उल्टी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन बार-बार होने वाली उल्टी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. खासकर अगर मरीज तरल पदार्थ नहीं ले पा रहा है, पेशाब कम हो रहा है, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है या पेट में तेज दर्द के साथ उल्टी हो रही है, तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.डेंगू में तेज सिरदर्द भी काफी आम है. कई मरीजों को आंखों के पीछे दर्द के साथ सिरदर्द की शिकायत होती है. हालांकि अगर सिरदर्द असामान्य रूप से तेज हो, लगातार बढ़ता जाए या उसके साथ बार-बार उल्टी, भ्रम, अत्यधिक नींद, बेचैनी, गर्दन में अकड़न, बेहोशी या दौरे जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य डेंगू का लक्षण समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना जरूरी हो सकता है.
डेंगू के दौरान कुछ अन्य चेतावनी संकेतों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून दिखाई देना, अत्यधिक कमजोरी, बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और बहुत ज्यादा सुस्ती गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं. इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सकीय देखभाल मिलनी चाहिए.डेंगू में एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि बुखार का उतरना हमेशा खतरा टलने का संकेत नहीं होता. कई बार परिवार को लगता है कि बुखार कम हो गया है, इसलिए मरीज ठीक हो रहा है. लेकिन डेंगू में बुखार कम होने के आसपास का समय कुछ मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. इसी दौरान चेतावनी वाले लक्षण सामने आ सकते हैं. इसलिए इस दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है.
मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त तरल पदार्थ लेने और आराम करने की कोशिश करनी चाहिए. डेंगू में बुखार और दर्द के लिए खुद से कोई भी दवा लेना सही नहीं है. खासकर ऐसी दर्द निवारक दवाओं से बचना चाहिए, जो रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं. दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही लें.सबसे जरूरी बात यह है कि डेंगू की गंभीरता का अंदाजा केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर नहीं लगाया जाना चाहिए. मरीज के लक्षण, ब्लड टेस्ट और उसकी पूरी क्लिनिकल स्थिति को देखकर डॉक्टर फैसला करते हैं. इसलिए लगातार उल्टी, असामान्य सिरदर्द या किसी भी चेतावनी संकेत को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर चिकित्सकीय मदद लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है.