Knews Desk- अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीयों के डिपोर्टेशन का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। हालांकि संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों को सबसे ज्यादा वापस भेजने वाला देश अमेरिका नहीं, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में पिछले वर्षों के रिकॉर्ड साझा करते हुए विभिन्न देशों से भारत लौटाए गए भारतीय नागरिकों का ब्यौरा दिया।
राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे के सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशी सरकारें हर डिपोर्टेशन या गिरफ्तारी की जानकारी भारत के साथ साझा नहीं करतीं। भारत के पास केवल उन्हीं मामलों का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है, जिनमें नागरिक की पहचान सत्यापित करनी होती है या इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसलिए उपलब्ध आंकड़े भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के रिकॉर्ड पर आधारित हैं।
2025 में किन देशों से लौटाए गए सबसे ज्यादा भारतीय
सरकार के अनुसार वर्ष 2025 में सबसे अधिक भारतीय UAE से वापस भेजे गए। इसके बाद अमेरिका, मलेशिया, म्यांमार और कंबोडिया का स्थान रहा।
- UAE – 7,896
- अमेरिका – 3,500
- मलेशिया – 1,675
- म्यांमार – 1,675
- कंबोडिया – 1,300
- थाईलैंड – 535
- रूस – 464
- कनाडा – 448
- चीन – 283
- हांगकांग – 251
- बांग्लादेश – 231
UAE से लगातार बढ़ रही डिपोर्टेशन की संख्या
आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में UAE से भारत भेजे गए नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ी है।
- 2021 – 876
- 2022 – 1,203
- 2023 – 2,841
- 2024 – 5,212
- 2025 – 7,896
विशेषज्ञों का मानना है कि UAE में बड़ी संख्या में भारतीय रोजगार के लिए रहते हैं। ऐसे में वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भी रुकना, श्रम कानूनों का उल्लंघन और अन्य आव्रजन नियमों के मामलों में कार्रवाई अपेक्षाकृत अधिक होती है, जिससे डिपोर्टेशन के मामले भी बढ़ जाते हैं।
मलेशिया, म्यांमार और कंबोडिया से भी बढ़े मामले
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से भारतीयों की वापसी के मामलों में भी तेजी देखी गई है। हाल के वर्षों में फर्जी नौकरी के झांसे, साइबर फ्रॉड और मानव तस्करी के नेटवर्क में फंसाए गए भारतीयों की संख्या बढ़ी है। बचाव अभियानों के दौरान इन देशों से भारतीय नागरिकों को भारत लाया गया।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, म्यांमार से 2024 में 147 भारतीय लौटे थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,596 हो गई। कंबोडिया से 2024 में 982 भारतीय वापस आए थे, जो 2025 में बढ़कर 1,300 हो गए। वहीं मलेशिया से 2024 में 1,259 और 2025 में 1,675 भारतीयों को वापस भेजा गया।
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारतीयों का अवैध प्रवास अब केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी बड़ी संख्या में लोग फर्जी नौकरी, साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क और अवैध एजेंटों के जाल में फंस रहे हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है, क्योंकि सभी देश हर डिपोर्टेशन की सूचना भारत को उपलब्ध नहीं कराते।
विदेशों में फंसे भारतीयों की मदद कैसे करती है सरकार?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि संकट में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए भारतीय दूतावासों की 24×7 हेल्पलाइन, आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर, ईमेल सेवा, MADAD पोर्टल, CPGRAMS, ई-मजिस्ट्रेट पोर्टल और प्रवासी भारतीय सहायता केंद्र का उपयोग किया जाता है।
इसके अलावा eMigrate पोर्टल के माध्यम से सुरक्षित और कानूनी प्रवास को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। लोगों को फर्जी भर्ती एजेंसियों से सतर्क रहने की सलाह दी जाती है और राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर ऐसे एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।