ईरान की एयरलाइंस पर अमेरिका का शिकंजा, भारत के सामने क्या है अगली चुनौती?

Knews Desk– ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को करीब सात महीने हो चुके हैं। इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने चेतावनी दी है कि 23 सितंबर से ईरानी एयरलाइंस को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से बाहर करने की कोशिश की जाएगी। अमेरिका का यह कदम ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।अमेरिका ने विदेशी कंपनियों को भी चेतावनी दी है कि अगर वे ईरानी विमानों को फ्यूल, लैंडिंग या अन्य विमानन सेवाएं उपलब्ध कराती हैं तो उन्हें भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में ईरानी एयरलाइंस के लिए दूसरे देशों में परिचालन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।भारत की स्थिति को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला या टिप्पणी सामने नहीं आई है। भारत और ईरान के बीच हवाई संपर्क के तहत महान एयर और ईरान एयर का संचालन होता रहा है। ऐसे में अमेरिकी कदम का असर भारत और ईरान के बीच हवाई सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2026 में भारत से ईरान के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या करीब 1.69 लाख बताई गई। हालांकि, यह आंकड़ा केवल ईरान जाने वाले यात्रियों का नहीं है, क्योंकि इसमें कनेक्टिंग फ्लाइट से यात्रा करने वाले यात्री भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए इससे प्रतिदिन ईरान जाने वाले यात्रियों की सटीक संख्या तय नहीं की जा सकती।अमेरिकी दबाव के बीच कुछ देशों ने ईरानी उड़ानों को लेकर कदम उठाए हैं। इराक ने 23 सितंबर से ईरानी उड़ानों को बगदाद एयरपोर्ट पर रोकने का फैसला किया है। ओमान भी पहले ही महान एयर की उड़ानों पर रोक लगा चुका है। जॉर्जिया ने ईरानी विमानों के अपने एयरस्पेस में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं, महान एयर ने बताया है कि तुर्की सरकार के अनुरोध के बाद उसने तुर्की के लिए अपनी उड़ानें रोक दी हैं।

दूसरी ओर, चीन और रूस ने अमेरिकी प्रतिबंधों को स्वीकार करने का संकेत नहीं दिया है। चीन ने अमेरिकी एकतरफा प्रतिबंधों को अवैध बताते हुए कहा है कि वह इन्हें ईरानी एयरलाइंस पर लागू नहीं करेगा। पाकिस्तान और तुर्किये की स्थिति भी अलग-अलग परिस्थितियों के बीच देखी जा रही है।भारत के सामने इस मामले में दो महत्वपूर्ण पक्ष हैं। एक तरफ अमेरिका के साथ भारत के आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के साथ भारत के लंबे समय से व्यापारिक और रणनीतिक रिश्ते हैं। ऐसे में भारत का कोई भी फैसला इन दोनों संबंधों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया जा सकता है। फिलहाल भारत की ओर से ईरानी उड़ानों पर रोक लगाने को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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