Knews Desk- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया, जिसमें भारत और चीन को “हेलहोल” यानी नरक जैसा देश बताया गया। यह पोस्ट कंजरवेटिव पॉडकास्ट होस्ट माइकल सैवेज की टिप्पणी पर आधारित थी, जिसने अमेरिका की बर्थराइट नागरिकता नीति (जन्म के आधार पर नागरिकता) पर सवाल उठाए थे।

पोस्ट में दावा किया गया कि अमेरिका में प्रवासी अपने बच्चों को जन्म के आधार पर नागरिकता दिलाकर बाद में अपने परिवार को भारत, चीन या अन्य देशों से अमेरिका बुला लेते हैं। इसमें यह भी कहा गया कि इस वजह से अमेरिका में भाषा और सांस्कृतिक पहचान बदल रही है और कई जगहों पर अंग्रेजी का इस्तेमाल कम हो रहा है। इसी तरह की सोच रखने वाले ट्रंप और उनके समर्थक लंबे समय से इस कानून का विरोध करते रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग करते हैं।
ट्रंप का मानना है कि नागरिकता से जुड़े फैसले अदालतों या वकीलों के बजाय सीधे जनता के वोट से होने चाहिए। उनका यह भी कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है ताकि इमिग्रेशन पर नियंत्रण रखा जा सके। इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका में भारतीय समुदाय की बढ़ती आबादी भी चर्चा का बड़ा कारण बन गई है। अमेरिकी सेंसस ब्यूरो के अनुमान के अनुसार, 2023 में अमेरिका में करीब 52 लाख लोग खुद को भारतीय मूल का बताते हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय-अमेरिकी समुदाय एशियाई आबादी का लगभग 21% हिस्सा है और यह अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा एशियाई समूह बन चुका है।
दो दशकों में भारतीय प्रवासियों की संख्या में हुई तेज़ी से बढ़ोतरी
पिछले दो दशकों में भारतीय प्रवासियों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2000 में यह संख्या लगभग 18 लाख थी, जो 2023 तक बढ़कर 49 लाख से अधिक हो गई, यानी करीब 174% की वृद्धि। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो भारत से अमेरिका जाकर बसे हैं, जबकि कई लोग अमेरिका में जन्मे हैं लेकिन अपनी पहचान भारतीय मूल के रूप में रखते हैं। भारतीय समुदाय अमेरिका में शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी काफी मजबूत स्थिति में है। 25 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 77% भारतीयों के पास ग्रेजुएशन या उससे अधिक की डिग्री है। इसके अलावा, 84% से अधिक लोग अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं, जबकि कई परिवार घर में हिंदी, तेलुगु, गुजराती और तमिल जैसी भाषाएं भी बोलते हैं।
अमेरिका में बर्थराइट नागरिकता का मुद्दा
भौगोलिक रूप से देखें तो सबसे अधिक भारतीय कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और इलिनोइस जैसे राज्यों में रहते हैं। आर्थिक रूप से भी भारतीय समुदाय मजबूत माना जाता है, जहां औसत घरेलू आय 1.5 लाख डॉलर से अधिक है और लगभग 62% लोग अपने घर के मालिक हैं। हालांकि, बर्थराइट नागरिकता का मुद्दा अमेरिका में लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। 1868 के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक माना जाता है। ट्रंप ने 2025 में इस व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया था, लेकिन यह मामला अब भी अमेरिकी अदालतों में विचाराधीन है।
ट्रंप का यह बयान एक बार फिर इमिग्रेशन, नागरिकता और अमेरिका में प्रवासी समुदाय की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ गया है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों का नाम आने से विवाद और गहरा हो गया है।