Knews Desk- पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में छात्रों और युवाओं के कथित तौर पर लापता होने के मामलों ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मामलों में बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलूच ने इन घटनाओं की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि कई छात्रों और युवाओं को उनके घरों, हॉस्टल और शैक्षणिक संस्थानों से कथित रूप से उठाया गया है। उनका कहना है कि इनमें से कुछ लोग सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे और उनके अचानक गायब होने से क्षेत्र में डर का माहौल बन रहा है।
नागरिक अधिकारों को लेकर बढ़ी चिंता
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने के आरोप लंबे समय से सामने आते रहे हैं। उनका दावा है कि युवाओं को निशाना बनाए जाने से शिक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी और नागरिक अधिकारों पर असर पड़ रहा है।
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ऐसी घटनाएं लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं और सरकार को इस मामले में पारदर्शी जांच करानी चाहिए।
सरकार ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इन आरोपों को पहले भी खारिज करती रही हैं। सरकार का कहना है कि जिन लोगों के लापता होने की शिकायतें सामने आती हैं, उनमें से कई प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ जाते हैं या अपनी मर्जी से कहीं और चले जाते हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग
मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि लापता लोगों की जानकारी सार्वजनिक की जाए और हर मामले की निष्पक्ष जांच हो। संगठनों का कहना है कि कानून व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को इस मुद्दे पर ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे।