हिमाचल में घटेंगे IAS-IPS के स्वीकृत पद, जानिए देशभर में कितने अधिकारी और कहां कितनी कमी

हिमाचल प्रदेश सरकार ने IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या कम करने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि जरूरत से ज्यादा अधिकारियों को राज्य कैडर में रखने से खर्च बढ़ता है। वहीं, देश के कई राज्यों में स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में अधिकारी पहले से ही कम हैं।

Knews Desk- हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक अधिकारियों के कैडर को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार IAS, IPS और IFS के स्वीकृत पदों की संख्या घटाने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि प्रदेश को अधिकारियों की बड़ी संख्या से ज्यादा ऐसे अफसरों की जरूरत है, जो योजनाओं और सरकारी नीतियों को प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू कर सकें।

सरकार के मुताबिक, कई बार स्वीकृत पदों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद सभी अधिकारियों को पर्याप्त जिम्मेदारी या काम नहीं मिल पाता। ऐसे में कैडर में जरूरत से अधिक पद बनाए रखना सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

हिमाचल में सबसे ज्यादा कटौती IAS कैडर में की जाएगी। फिलहाल राज्य में IAS के 153 स्वीकृत पद हैं। सरकार इन्हें घटाकर 130 करने की तैयारी में है। यानी कुल 23 पद कम किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश का प्रशासन करीब 100 से 110 IAS अधिकारियों से भी चलाया जा सकता है। हालांकि अधिकारियों से मिले सुझावों के बाद 130 स्वीकृत पद रखने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा IFS के स्वीकृत पद 118 से घटाकर 83 और IPS के 96 से भी कम किए जाने की योजना है।

कई राज्यों में हजारों पद खाली

दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हिमाचल सरकार स्वीकृत पदों की संख्या घटाने की तैयारी कर रही है, वहीं देश के कई राज्यों में स्वीकृत पदों के मुकाबले अधिकारी कम हैं।

केंद्र सरकार की ओर से 12 फरवरी 2026 को संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2025 तक 25 IAS, IPS और IFS कैडर में कुल 6,877 IAS पदों में 5,577 अधिकारी तैनात थे। यानी 1,300 पद खाली थे।

इसी तरह 5,099 स्वीकृत IPS पदों में 4,594 अधिकारी तैनात थे, जबकि 505 पद खाली थे। IFS के 3,193 स्वीकृत पदों में 2,164 अधिकारी तैनात थे और 1,029 पद खाली थे।

हालांकि खाली पदों का मतलब यह नहीं है कि हर पद पर तुरंत नियुक्ति जरूरी है। कैडर की जरूरत, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, प्रमोशन, रिटायरमेंट और प्रशासनिक परिस्थितियों के कारण स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती में अंतर हो सकता है।

IAS में सबसे ज्यादा स्वीकृत पद यूपी में

राज्यों की बात करें तो IAS के सबसे ज्यादा 652 स्वीकृत पद उत्तर प्रदेश में हैं। इनमें से 571 पदों पर अधिकारी तैनात थे। इसके बाद AGMUT कैडर में 542, मध्य प्रदेश में 459, महाराष्ट्र में 435 और तमिलनाडु में 394 स्वीकृत पद हैं।

IPS के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। यूपी में 541 स्वीकृत IPS पद हैं, जिनमें 510 अधिकारी तैनात थे। इसके बाद AGMUT में 457, पश्चिम बंगाल में 347, महाराष्ट्र में 329 और मध्य प्रदेश में 319 पद हैं।

IFS के मामले में मध्य प्रदेश में 296 स्वीकृत पद हैं, जबकि AGMUT कैडर में 302 पद हैं। उत्तर प्रदेश में IFS के 217 स्वीकृत पद हैं। AGMUT कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करने वाला संयुक्त कैडर है, इसलिए इसकी तुलना किसी एक राज्य से सीधे करना उचित नहीं होगा।

हिमाचल सरकार का तर्क क्या है?

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मुताबिक, राज्य में 153 IAS अधिकारियों की जरूरत नहीं है। उनका मानना है कि कम संख्या में अधिकारी भी प्रशासन को प्रभावी ढंग से संभाल सकते हैं। इसी आधार पर 130 पदों का नया कैडर तय किया जा रहा है।

सुक्खू ने यह भी कहा है कि एक IAS अधिकारी पर करीब 200 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है। यह मुख्यमंत्री की ओर से बताया गया अनुमान है, जिसमें अधिकारी से जुड़े व्यापक प्रशासनिक खर्च और संसाधनों को शामिल किया गया है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जो अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं, उनके मामलों को तेजी से मंजूरी दी जाएगी। इससे राज्य कैडर में अतिरिक्त अधिकारियों की संख्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

क्या कम अधिकारी होने से प्रशासन बेहतर होगा?

यह सवाल अभी सबसे महत्वपूर्ण है। अधिकारियों की संख्या कम करने से निश्चित रूप से सरकारी खर्च में कमी आ सकती है, लेकिन इसका दूसरा पहलू प्रशासनिक क्षमता से जुड़ा है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में आपदा प्रबंधन, सड़क और परिवहन, पर्यटन, वन, कानून-व्यवस्था और दूरदराज के क्षेत्रों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में केवल अधिकारियों की संख्या कम करना ही प्रशासनिक सुधार का पैमाना नहीं हो सकता।

असल सवाल यह होना चाहिए कि राज्य को किस स्तर पर कितने अधिकारियों की जरूरत है और उनकी तैनाती कहां की जाए। देशभर के आंकड़े भी बताते हैं कि स्वीकृत पदों और वास्तविक तैनाती के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

1 जनवरी 2025 तक देश में IAS के 1,300, IPS के 505 और IFS के 1,029 स्वीकृत पद खाली थे। ऐसे में हिमाचल का फैसला सिर्फ पद घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहस भी खड़ी करता है कि सरकारी तंत्र में अधिकारियों की संख्या जरूरत के हिसाब से तय होनी चाहिए या पुराने स्वीकृत पदों के आधार पर।

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