Knews Desk – जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र को 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का नोटिस दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सवाल उठाया कि जब अदालत पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुकी थी, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस कैसे जारी कर दिया।
सुनवाई के दौरान वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने छात्र को जारी किए गए नोटिस का मुद्दा अदालत के सामने रखा। उन्होंने कहा कि यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश के बावजूद जारी किया गया था। वकील के मुताबिक, बाद में मीडिया में खबर सामने आई कि पुलिस ने नोटिस वापस ले लिया है।
वकील ने अदालत से कहा कि छात्रों के बीच डर का माहौल नहीं बनाया जाना चाहिए और अधिकारियों की ओर से की गई ऐसी कार्रवाई शीर्ष अदालत के आदेश के खिलाफ हो सकती है।
मामले पर CJI सूर्य कांत ने कहा कि अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऐसे में मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया जाना हैरान करने वाला है।
CJI ने कहा कि अदालत इस मामले में संबंधित मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगेगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। कोर्ट ने वकील से मामले से जुड़े तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने को भी कहा।
क्या नोटिस वास्तव में वापस लिया गया?
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने भी नोटिस वापस लिए जाने की जानकारी को लेकर सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या वकील को आधिकारिक तौर पर इसकी सूचना मिली है।
इस पर वकील ने कहा कि उन्हें इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है और नोटिस वापस लिए जाने की बात केवल मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आई है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का आदेश सार्वजनिक था, इसलिए अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठता है। इस पर CJI ने कहा कि मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा।
यह मामला गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी से जुड़ा है। पुलिस का आरोप था कि छात्र ने अन्य विद्यार्थियों को जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। इसी के बाद उसे शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का नोटिस दिया गया था।
हालांकि, बाद में पुलिस की ओर से बताया गया कि छात्र को जारी किया गया शांति बंधपत्र नोटिस वापस ले लिया गया है।
छात्र ने आरोपों से किया इनकार
अक्षत त्रिपाठी ने पुलिस के आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि उसने प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से हिस्सा लिया था। छात्र के मुताबिक, प्रदर्शन के समय वह विश्वविद्यालय की कक्षाओं में भी शामिल नहीं हो रहा था।
गौरतलब है कि शांति बंधपत्र का नोटिस किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने या सजा देने की कार्रवाई नहीं होती। यह एक एहतियाती प्रक्रिया है, जिसके तहत प्रशासन किसी व्यक्ति से भविष्य में शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन मांग सकता है।