न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 3 जुलाई को इम्पा द्वारा दिए गए फैसले को रद्द कर दिया और मुकदमे का निपटारा कर दिया। इसे प्रोडक्शन बैनर के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
KNEWS DESK- प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी और उनके प्रोडक्शन बैनर सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी कानूनी राहत मिली है। दरअसल, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की डिस्प्यूट रेज़ोल्यूशन कमेटी द्वारा कंपनी के खिलाफ दिए गए फैसले को रद्द कर दिया गया।
3 जुलाई, 2026 को प्रोडक्शन हाउस ने IMPPA अवॉर्ड को चुनौती देने के लिए कोर्ट का रुख किया था। ऐसे में, बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई कर फैसला सैफ्रॉन मैजिकवर्क्स के पक्ष में सुनाया। इस तरह से ऑफिशियल तौर से केस का निपटारा हो गया है, जिससे यह कानूनी कार्रवाई अब खत्म हो गई है। यह ऑर्डर माननीय न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 23 अक्टूबर, 2026 को पास किया। बता दें कि यह अंतिम फैसला कोर्ट के 9 सितंबर, 2026 को पास किए गए एक अंतरिम ऑर्डर के बाद आया है, जिसमें विवादित अवॉर्ड के आधार पर बैनर को डिफॉल्टर घोषित करने से IMPPA को रोककर सैफरन मैजिकवर्क्स को सुरक्षा दी गई थी।
मामले को लेकर सामने आए परिणाम पर बात करते हुए, सफ्रॉन मैजिकवर्क्स की ओर से पैरवी करने वाली आनंद एंड नाइक की मधु गडोदिया ने एक ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा है:
“हमारे क्लाइंट, सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने 3 जुलाई 2026 को इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPPA) की डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन कमेटी के दिए गए फैसले को चैलेंज करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। बॉम्बे हाई कोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 23 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में इस फैसले को रद्द करते हुए मुकदमे का निपटारा कर दिया। यह मामला इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन और डिपेंडेंट नंबर 2 के खिलाफ दायर किया गया था। सफ्रॉन मैजिकवर्क्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से श्री रश्मिन खांडेकर, श्री ध्रुव गांधी, मधु गडोदिया, श्री विवेक द्विवेदी, सुश्री विनीता दांडेकर और श्री आर्यन गर्ग ने पैरवी की। इस मामले में उन्हें आनंद एंड नाइक द्वारा निर्देश दिए गए थे। हम इसे एक जरूरी डेवलपमेंट मानते हैं। नतीजा खुद सब बयां करता है।”
यह रेजोल्यूशन इस विवाद का अंत है, जिससे यह साफ हो गया है कि मामला से जुड़ा संबंधित फैसला रद्द हो गया है। इस मामले में अब कोई भी कार्यवाही बाकी नहीं है।