Knews Desk– गेहूं दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसलों में से एक है। एशिया के कई देशों में यह लोगों के दैनिक भोजन का प्रमुख हिस्सा है। भारत में गेहूं से रोटी, पराठा और अन्य खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं, जबकि चीन में इसका इस्तेमाल नूडल्स, डंपलिंग्स, स्टीम्ड बन्स और कई पारंपरिक व्यंजनों में होता है। गेहूं उत्पादन की बात करें तो भारत दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन पहले स्थान पर नहीं। दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादन करने वाला देश चीन है, जबकि भारत दूसरे स्थान पर आता है।वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के आंकड़ों के अनुसार, चीन हर साल 137 मिलियन टन से अधिक गेहूं का उत्पादन करता है। इसके बाद भारत का स्थान है, जहां सालाना 107 मिलियन टन से अधिक गेहूं पैदा होता है। तीसरे स्थान पर रूस, चौथे पर अमेरिका और पांचवें स्थान पर ऑस्ट्रेलिया है। पाकिस्तान भी प्रमुख गेहूं उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन उत्पादन के मामले में वह चीन और भारत से काफी पीछे है।
चीन के शीर्ष पर रहने की सबसे बड़ी वजह वहां का विशाल कृषि क्षेत्र, आधुनिक खेती तकनीक, बेहतर सिंचाई व्यवस्था और उच्च उत्पादकता है। चीन में गेहूं का उपयोग सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। वहीं भारत में बढ़ती आबादी के कारण गेहूं की मांग लगातार बढ़ रही है और देश का अधिकांश उत्पादन घरेलू खपत में ही इस्तेमाल हो जाता है।गेहूं की अच्छी पैदावार के लिए उपयुक्त जलवायु और मिट्टी बेहद जरूरी होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बुवाई के समय 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान और फसल पकने के दौरान 21 से 26 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। इसके अलावा गेहूं की खेती के लिए 50 से 75 सेंटीमीटर तक वर्षा आदर्श रहती है। हालांकि जरूरत से ज्यादा बारिश फसल को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि पकने के समय तेज धूप अच्छी गुणवत्ता और अधिक उत्पादन में मदद करती है।
भारत में गेहूं की खेती मुख्य रूप से उत्तर और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में होती है, जहां की जलवायु और जलोढ़ मिट्टी इस फसल के लिए अनुकूल मानी जाती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है। गंगा-यमुना के दोआब की उपजाऊ मिट्टी, नहरों और ट्यूबवेल की मजबूत सिंचाई व्यवस्था यहां उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। यहां ठंडी सर्दियां और खेती का बढ़ता रकबा किसानों को बेहतर उत्पादन देने में मदद करता है। पंजाब तीसरे स्थान पर है, जहां हरित क्रांति, उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और प्रभावी सिंचाई व्यवस्था के कारण गेहूं की पैदावार काफी अधिक होती है। हरियाणा भी उत्कृष्ट सिंचाई और मशीनीकरण के दम पर देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल है। वहीं राजस्थान में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के बाद सिंचित क्षेत्र बढ़ने से गेहूं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।