Knews Desk: फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) को लेकर विरोध कर रहे विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट छात्रों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) की विशेषज्ञ समिति ने FMGE परीक्षा साल में तीन बार आयोजित करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया है. हालांकि, NBEMS ने साफ किया है कि डॉक्टर बनने के लिए जरूरी न्यूनतम योग्यता के मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.
FMGE भारत में विदेश से मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए एक स्क्रीनिंग परीक्षा है. इसे पास करने के बाद ही विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. परीक्षा को लेकर छात्रों की ओर से लंबे समय से कई मांगें उठाई जा रही हैं. इनमें परीक्षा की आवृत्ति बढ़ाने, फीस की समीक्षा, परीक्षा केंद्रों में बेहतर सुविधाएं और परीक्षा प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता शामिल हैं.NBEMS की विशेषज्ञ समिति ने छात्रों की इन मांगों पर विचार करते हुए FMGE को साल में तीन बार आयोजित करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया है. अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो छात्रों को परीक्षा देने के लिए मौजूदा अवसरों की तुलना में अधिक मौके मिल सकते हैं. इससे उन उम्मीदवारों को भी राहत मिलने की उम्मीद है, जो एक परीक्षा में असफल होने के बाद अगले अवसर के लिए लंबा इंतजार करते हैं.
समिति ने परीक्षा फीस की समीक्षा करने और परीक्षा केंद्रों की सुविधाओं में सुधार का भी सुझाव दिया है. इसके अलावा छात्रों को परीक्षा में दिए गए अपने रिकॉर्डेड जवाब देखने की सुविधा देने पर भी विचार किया गया है. हालांकि, इसके लिए तकनीकी और कानूनी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी होगा. इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन को समझने और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर ज्यादा भरोसा मिल सकता है.हालांकि, जून 2026 की FMGE परीक्षा के परिणाम को लेकर समिति ने ग्रेस या अतिरिक्त अंक देने की सिफारिश नहीं की है. समिति को ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि वीडियो वाले सवालों या प्रश्नपत्र की कठिनाई ने परीक्षा के नतीजों को अनुचित तरीके से प्रभावित किया था. NBEMS का कहना है कि केवल कुल पास प्रतिशत में कमी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरा प्रश्नपत्र गलत या अन्यायपूर्ण था.
जून 2026 में पहली बार FMGE परीक्षा देने वाले 35.74 प्रतिशत उम्मीदवार पास हुए. दूसरी बार परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों का पास प्रतिशत 21.45 प्रतिशत रहा, जबकि पांच से ज्यादा बार परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों में सिर्फ 3.29 प्रतिशत छात्र सफल हुए. इसके मुकाबले दिसंबर 2025 में पहली बार परीक्षा देने वाले 47.53 प्रतिशत उम्मीदवार पास हुए थे, जबकि पांच से ज्यादा बार परीक्षा देने वालों का पास प्रतिशत 5.58 प्रतिशत था.NBEMS ने पास प्रतिशत में कमी को लेकर कहा है कि FMGE कोई प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा नहीं, बल्कि भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए आवश्यक स्क्रीनिंग परीक्षा है. डॉक्टरों को हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सेप्सिस, जटिल गर्भावस्था और बच्चों की इमरजेंसी जैसी गंभीर परिस्थितियों से निपटना पड़ सकता है. इसलिए न्यूनतम योग्यता का स्तर बनाए रखना मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी है.
विशेषज्ञ समिति ने प्रश्नपत्र की कठिनाई के स्तर को संतुलित रखने का भी सुझाव दिया है. इसके तहत करीब 30 प्रतिशत सवाल आसान, 50 प्रतिशत मध्यम और 20 प्रतिशत कठिन स्तर के रखने की बात कही गई है. साथ ही प्रश्नपत्र की औसत कठिनाई 5.5 से अधिक नहीं रखने का सुझाव दिया गया है.कुल मिलाकर, FMGE को साल में तीन बार आयोजित करने का प्रस्ताव छात्रों के लिए राहत भरा कदम हो सकता है. हालांकि, यह अभी केवल विशेषज्ञ समिति का सुझाव है और अंतिम फैसला संबंधित स्तर पर लिया जाना बाकी है.